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जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के मनगढ़ आश्रम पर 63 की नरवली

Posted on 05 March 2010 by admin

प्रतापगढ़ मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर कुंडा कोतवाली क्षेत्र स्थित जगद्गुरु कृपालु जी महाराज के मनगढ़ आश्रम   पर प्रसाद, थाली-कंबल के लिए मची होड़ में इस कदर अव्यवस्था फैली कि भगदड़ मच गयी। चीख-पुकार के बीच लोग एक-दूसरे पर गिरने-पड़ने लगे, रौंदने लगे। देखते ही देखते मंदिर प्रांगण में 63 लाशें बिछ गयीं। मौत के शिकार लोगों में 37 तो बच्चे थे और 26 महिलाएं।  इस हादसे में दो सौ से ज्यादा लोग जख्मी हैं। आश्चर्यजनक तथ्य सामने आया है कि इतने बड़े आयोजन में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए महज 18 पुलिस कर्मी तैनात थे। अब आश्रम से लेकर प्रशासन तक अपना पल्ला झाड़ने में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक कुंडा थाना क्षेत्र स्थित मनगढ़ आश्रम में सुबह से प्रवचन सुनने और कृपालु महाराज की पत्नी के श्राद्ध में शामिल होने के लिए तीस हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए थे। आश्रम के एक बड़े हाल में प्रसाद एवं कपड़ा वितरण होना था। प्रसाद पाने के लिए महिलाओं और पुरुषों के साथ ही बड़ी संख्या में बच्चे भी लाइन में लगे थे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए करीब दो सौ मीटर लंबी बैरीकेडिंग थी। प्रसाद वितरण का कार्यक्रम शुरू होते ही भीड़ में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करीब 11 बजे कुछ लोगों ने मेन गेट खोल दिया और आगे बढ़ने की होड़ में वहां भगदड़ मच गयी। चीख-पुकार के बीच लोग एक-दूसरे पर गिरते-पड़ते भागने लगे। जो भी गिरा, पैरों तले रौंद गया। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल। कुछ ही मिनटों में जिधर देखो, या तो लाशें थीं या फिर जख्मी और मदद के लिए चीखते-पुकारते लोग। साथ में विभीषिका बयान कर रही थे चारो तरफ बिखरे जूता-चप्पल।

हादसे की खबर सुनकर मौके पर पहुंचे पुलिस-प्रशासन के अफसरों ने जब मृतकों और घायलों की तादाद देखी तो होश फाख्ता हो गये। जैसे-तैसे व्यवस्था कर तकरीबन दो सौ लोगों को कुंडा, प्रतापगढ़ और इलाहाबाद के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ज्यादातर लोगों की मौत गेट के निकट बोरवेल में गिरने के कारण हुई। मृतकों के परिजनों में इस बात को लेकर खासा गुस्सा रहा कि पुलिस शवों को उठाने से रोक रही थी। जिला प्रशासन के अफसरों का दावा है कि आयोजन को लेकर पूर्व में कोई सूचना नहीं थी।

सूचना पर प्रदेश के लोकनिर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी तथा पंचायतीराज मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य भी हेलीकाप्टर से मौके पर पहुंच गये। हजारों की संख्या में आक्रोशित भीड़ आश्रम और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रही थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इलाहाबाद, प्रतापगढ़ और कौशाम्बी की फोर्स बुलानी पड़ी।

सरकार ने माना इंतजाम पूरे नहीं थे

सायंकाल यहां पहुंचे पंचायतीराज मंत्री स्वामी प्रसाद मौैर्य ने स्वीकार किया कि लोगों की भीड़ के नजरिये से यहां इंतजाम पूरे नहीं थे। उन्होंने कहा कि घटना की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उनके साथ प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता भी थे।

मंदिर प्रशासन ने पल्ला झाड़ा

घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने इसकी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया। कृपालु महाराज की ओर से इस बाबत कोई संदेश नहीं दिया गया। उनका काम-धाम देखने वाले रजनीश पुरी ने अलबत्ता कहा कि हमने किसी को बुलाया नहींथा। जो लोग आये थे वे स्वयं इकट्ठा हुए थे। पुरी ने कहा कि हमने 25 फरवरी को ही प्रशासन को अवगत करा दिया था कि यहां इस तरह का आयोजन किया जाने वाला है, लेकिन उनकी ओर से कोई व्यवस्था नहीं हुई।

गेट पर सिर्फ दो सिपाही

प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि भीड़ लगभग 30 हजार थी, लेकिन उसे नियंत्रित करने वाला कोई नहीं था। सुरक्षा के नाम पर मात्र दो सिपाही लगाये गये थे, लेकिन वे भी पूरब के मुख्य द्वार पर वीआईपी के आगमन के नजरिये से तैनात थे। मंदिर के नजदीक लगभग दो सौ मीटर पर पुलिस चौकी है, लेकिन वहां से भी कोई नहीं पहुंचा था।

प्रतापगढ़ हादसे पर दुख जताया

राज्यपाल बीएल जोशी ने प्रतापगढ़ जिले में हुए हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। शोक संदेश में राज्यपाल ने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना करते हुए उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी ने हादसे की वजह प्रशासनिक लापरवाही बतायी है। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार ने हिंदू धार्मिक आयोजनों के प्रति लापरवाह दृष्टिकोण अपना रखा है, इसी वजह से स्थानीय प्रशासन ने इतनी भारी भीड़ जुटने के बाद भी अपनी तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की थी।

राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव मुन्ना सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष राम आसरे वर्मा, महासचिव अनिल दुबे ने मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को दो-दो लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की मांग उठायी है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी प्रतापगढ़ हादसे को दुखद बताया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी और कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी ने मृतकों के आश्रितों को दस-दस लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की मांग करते हुए कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिये कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है?


Vikas Sharma
bundelkhandlive.com
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