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साहित्योत्सव सम्मान-2016 से श्री किशन सरोज को सम्मानित किया गया।

Posted on 29 December 2016 by admin

संस्थान के यशपाल सभागार में सांय 6.15 से काव्य गोष्ठी का आयोजन श्री उदय प्रताप सिंह,  मा0 कार्यकारी अध्यक्ष, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें श्री किशन सरोज ने    पढ़ा - दूर तक फैला नदी का पाट, नावें थक गयीं। टूट कर हर दिन ढहा, तटबन्ध सा सम्बन्ध कोई, दीप बन हर रात डूबी धार में सौगन्ध कोई, देखता कौन किसकी बाट।
श्री सिद्धार्थ शाडिल्य ने पढ़ा - धुधलीं हुई यादों को उजालों की तरह रख, महबूब का गम पाँव के छालों की तरह रख।
श्री प्रखर मालवीय कान्हा ने पढ़ा - कहीं जीन से मैं डरने लगा तो, अजल के वक्त से घबरा गया तो, ये दुनियाँ अश्क से गम नापती है, अगर मै जब्त करके रह गया तो।
श्री शारिक कैफ़ी ने पढ़ा - हमीं तक रह गया किस्सा हमारा, किसी ने खत नहीं खोला हमारा, पढ़ाई चल रही है जिन्दगी की, अभी उतरा नहीं बस्ता हमारा।
सुश्री तारा इकबाल ने पढ़ा - मेरी आवाज पे वो लौट आ सकता था, सच तो यह है कि बुलाना ही नहीं आया मुझको। मुझसे रूठा है कहानी का मुसफिल मेरा, कोई किरदार निभाया नहीं आया मुझको। मुझसे पहचानने में भूल हुई, दर्द आया था नकाबों में।
जामाल कौसर ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा - गया जो छोड कर मुझको, तो तय किया उसने जो फासला किसी से हुआ ही नहीं। वक्त की जद में हम हैं अब हमारी खैर नहीं। नहर का पानी मीठा था, अब नहर की खैर नहीं।
श्री उदय प्रताप सिंह, मा0 कार्यकारी अध्यक्ष, उ0प्र0 हिन्दी संस्थान ने कहा - जमाने का न जाने कौन सा दस्तूर होता है, सताता है उसे जो दिल से कुछ मजबूर होता है। यही तारीखे दुनियाँ है यहाँ, मकबूल लोगों ने हिकारत से जिसे देखा, वही मशहूर होता है। उतरते ताज हिलते तख्त इन नदियों ने देखे है, ये हँसती हैं कोई जब दौलत पर मगरूर होता है।
कुँ0 रंजीत सिंह चैहान ने पढ़ा - किसी ख्याल से हम करवटें बदलने लगे, ओ मेरी फर कहीं नींद में न चलने लगे। धुआँ धुआँ यादें यही गनीमत है, मुझे ये डर, वो इसी याद  में न जलने लगे।
श्री मनीष शुक्ल, निदेशक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने पढ़ा - हँसी ख्वाबों के बिस्तर से उठाने आ गये शायद, नये सूरज मेरी नीदें उड़ाने शायद, कहानी एक उनमान पे आने ही वाली थी मगर फिर बीच में किस्से पुराने आ गये शायद। लबों पे मुस्कुराहट टाॅक लेते हैं सलीके से, हमें भी रिश्ते निभाने आ गये शायद।
कार्यक्रम का संचालन डाॅ0 अमिता दुबे, सम्पादक, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान ने किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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