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सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं रावतपुरा सरकार महाराजश्री

Posted on 24 April 2015 by admin

छिपरी (टीकमगढ़)! सांस्कृतिक संध्या के तीसरे दिन रात्रि 8 बजे अंतर्राष्टीय ख्याती प्राप्त पद्मश्री पं. छन्नूलाल मिश्र वाराणसी के गायन की प्रस्तुति से कुंभ में उपस्थित जन समुदाय ओत-प्रोत हो गया। पं. छन्नूलाल मिश्र ने प्रस्तुति के दौरान कहा कि यह मंच, मंच नहीं है बल्कि संगीत की साधना का मंदिर है। पंडित जी ने कार्यक्रम की शुरुआत राग कल्याण के बड़ा ख्याल एवं छोटा ख्याल से की तथा ठुमरी और अन्य प्रस्तुतियों के साथ केवल सम्राट भजन से कार्यक्रम का समापन किया।
रावतपुरा सरकार महाराजश्री ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि दीन-दुखी, छोटे-बड़े, अमीर-गरीब सभी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य को लेकर आध्यात्मिक भावना के साथ करना चाहिये। आज भगवान परशुराम का जन्मदिन हमें समर्पण और त्याग सिखाता है, संतो ंके जन्मदिन, जन्मस्थान समर्पण एवं त्याग की भावना सिखाते हैं। संतों की कृपा सत्संग से होती है। बुंदेलखण्ड में महुआ कल्प वृक्ष के रूप में जाना जाता है। मंच पर महुआ के पत्तों की सज्जा हमें प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम के अतिथि भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री प्रभात झा ने कहा कि रावतपुरा सरकार महाराजश्री सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। चम्बल के बीहड़ इलाकों में जहां गोलियों की आवाज गूंजा करती थी, वहां देवताओं की आराधना का मंदिर स्थापित कर सामाजिक परिवर्तन का दौर प्रारंभ किया है श्री रावतपुरा सरकार ने। संतों की तपोस्थली एव जन्मस्थली धार्मिक चेतना का केन्द्र होते हैं। सामाजिक कुंभ की शुरुआत भारत जैसे देश के लिए सामाजिक समरस्ता का उदाहरण है, जिसमें अमीर-गरीब, छोटा-बड़ा, हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी को सम्मान पूर्वक आमंत्रित किया गया है और सभी की भागीदारी है।
निवाड़ी विधायक श्री अनिल जैन ने कहा कि आज जंगल में जो आध्यात्मिक मंगल का उत्सव मनाया जा रहा है यह अद्भुत चमत्कार है।
इस अवसर पर श्री प्रभात झा, श्री अनिल जैन तथा पं. छन्नूलाल मिश्र को श्रीफल-शाॅल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
रात्रि 11 बजे से प्रारंभ हुई रासलीला में नाग नाथन लीला के वर्णन में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं के अंतर्गत यमुना में गेंद का गिरना और कालिया नाग के मस्तक पर बैठकर भगवान कृष्ण की नृत्य भंगीमाओं की प्रस्तुति दी गई।

आज (दि. 22.4.2015, बुधवार)
लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में प्रातः 6 बजे से यजुर्वेद, सामवेद के वेद पारायण पाठ के साथ ही पांचांग, मण्डप, प्रधान देवता श्री लक्ष्मीनारायण भगवान की पूजन के साथ 108-108 श्री सूक्त एवं पुरुसूक्त के पाठों के साथ यजमानों द्वारा विद्वान आचार्यों की उपस्थिति में आहुतियां दी गईं। लाखों श्रद्धालुओं द्वारा यज्ञशाला कि परिक्रमा का क्रम अभी भी जारी है। ललितासहस्त्राय, गणेशसहस्त्रायन, रुद्राभिषेक अनुष्ठानों के साथ हरे राम, हरे कृष्ण का लगातार संकीर्तन जारी है।
प्रातः 9 बजे से प्रारंभ हुई रामलीला में धनुष यज्ञ एवं सीता स्वयंवर की संगीतमय प्रस्तुति हुई।
अपरान्ह 2 बजे से प्रारंभ हुई श्रीमद्भागवत कथा में भागवताचार्य श्यामसुंदर पाराशर जी ने अपने श्रीमुख से त्रिया चरित्र के प्रसंगों के माध्यम से भागवत् कथा में संगीतमय प्रस्तुति के साथ दशरथ केकई संवाद और पत्नि-पति के प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक सुधार की आवश्यता पर जोर दिया।
रात्रि 7 बजे से गीता चन्द्रन, दिल्ली द्वारा भरत नाट्यम व रितु वर्मा, रायपुर द्वारा पण्डवानी की प्रस्तुति होगी, दैनिक भास्कर समूह के चेयरमेन श्री रमेशचन्द्र अग्रवाल विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे जिनका श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया जायेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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