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बेमौसम लगातार बरसात ने किसानों की जिन्दगी में कहर बरपा दिया है।

Posted on 01 April 2015 by admin

बेमौसम लगातार बरसात ने किसानों की जिन्दगी में कहर बरपा दिया है। अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और उस पर तेज हवाओं ने प्रदेश के तीन चैथाई जनपदों के किसानों की फसलों को पूरी तरह तबाह और बर्बाद कर दिया है और कल हुई बारिश ने तो किसानों और मजदूरों की कमर ही तोड़ दी है, किन्तु विडम्बना तो यह है कि प्रदेश की सरकार और केन्द्र की सरकार एक दूसरे पर आरोप मढ़कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।
प्रदेश कंाग्रेस के प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने आज यहां जारी बयान में कहा कि प्रदेश की सरकार इस वर्ष को किसान वर्ष के रूप में मना रही है और किसान के दुःख में कहीं शरीक नहीं दिख रही है। किसानों को न मुआवजा मिल रहा है और न उनकी कर्ज अदायगी को रोकने का शासन द्वारा सरकार के आदेश का पालन किया जा रहा है। जिससे तंग होकर किसान आत्महत्या कर रहा है। पिछले दिनों हुई आत्महत्याओं को राज्य और केन्द्र सरकारें फसल की बर्बादी और कर्ज की अदायगी को लेकर किसान आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं।
श्री राजपूत ने कहा कि केन्द्र सरकार ने माना है कि पूरे देश में लगभग 62 लाख हेक्टेयर गेहूं की फसल बर्बाद हुई है। जिसमें लगभग 27लाख हेक्टेयर उ0प्र0 में हुई है, विडम्बना यह है कि अब तक केन्द्र सरकार ने एक भी पैसा किसानों की सहायता के लिए निर्गत नहीं किये हैं। जब केन्द्र सरकार के अधिकारियों ने यह आंकलन कर लिया है तो केन्द्र सरकार के नियमानुसार प्रति हेक्टेयर मुआवजा निर्गत करने में केन्द्र सरकार को क्या आपत्ति है? वस्तुतः यह सरकार किसानों के हित की नहीं बल्कि कारपोरेट व्यापारियों की हितैषी सरकार है। इसे किसानों की समस्या और मजदूरों की समस्या से कोई मतलब नहीं है। केन्द्र की सरकार किसानों से उनका मालिकाना हक भी छीनकर व्यापारियों को और बड़े कारपोरेट घरानों को देना चाहती है। भारत सरकार को चाहिए कि वह वर्तमान नियमों में छूट देकर अधिक से अधिक किसानों को मुआवजा दे।
उन्होने कहा कि वर्तमान नियमानुसार 50 प्रतिशत की फसल बर्बादी तक किसानों को कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है और सरकारी अधिकारी सारी फसलों का नुकसान 49 प्रतिशत तक का आंकलन कर देते हैं इससे किसानों को मुआवजा नहीं मिलता है। वर्तमान व्यवस्था से अदम गोण्डवी का एक शेर याद आ जाता है जिसमें उन्होने  कहा कि - तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है-मगर यह आंकड़े झूठे, यह दावे किताबी हैं। तुम्हारी मेज चांदी की-तुम्हारे जाम सोने के, मगर जुम्मन के घर में आज भी टूटी रकाबी है।।
उ0प्र0 कंाग्रेस कमेटी मांग करती है कि किसानों को कम से कम बीस हजार रूपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा सरकार अविलम्ब दे और किसानों के सारे ऋण माफ करे, चाहे वह कोआपरेटिव के हों या बैंकों के, ताकि किसानों के कुछ आंसू पोंछे जा सकें और वह आत्महत्या के लिए विवश न हों।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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