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धान की फसल को फुदका, गंधी, दीमक, झुलसा आदि कीट/रोगों से बचायें

Posted on 12 September 2014 by admin

धान की फसल में हरा, भूरा एवं सफेद वाले फुदका कीट के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस0एल0, 125 मिली. अथवा मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एस0एल0की 750 मिली0 अथवा डाइक्लोरावास 76 प्रतिशत ई.सी. 500 मिली. मात्रा को प्रति हे0 दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर प्रति हे0 की दर से छिड़काव करें।
उ0प्र0 कृषि अनुसंधान परिषद में आयेाजित बैठक में फसल सतर्कता समूह के कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को दी गई सलाह के अनुसार धान में गंधी कीट वाली की दुग्धावस्था में लगता है। गंधी कीट 1-2 कीट प्रति पंुज दिखाई देने पर मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत धूल 20-25 किग्रा0 अथवा मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल 20-25 किग्रा0 अथवा फेनबैलरेट 0.04 प्रतिशत धूल 20-25 किग्रा0 का प्रति हे0 की दर से बुरकाव किया जाये।
धान में भूरा धब्बा एवं झोंका रोग की रोकथाम हेतु एडीफेनफाॅस 50 प्रतिशत ई0सी0 500 मिली. अथवा मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्लू पी. 2.0 किग्रा0 अथवा जिनेब 75 प्रतिशत डब्लू.पी. 2.0 किग्रा0 प्रति हे0 500-750 लीटर पानी घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिये।
दीमक एवं जड़ की सूड़ी के नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 लीटर प्रति हे0 की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिये। जड़ की सूड़ी के नियंत्रण के लिए फोरैट 10 जी 10 किग्रा0 3-5 सेमी0 स्थिर पानी में बुरकाव भी किया जाना चाहिये। रोपित धान में रोपाई के 45-50 दिन बाद नत्रजन की शेष चैथाई मात्रा से द्वितीय टाॅप ड्रेसिंग करें।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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