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पशुपालक कृत्रिम गर्भाधान की सुदृढ़ व्यवस्था से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में कामयाब होंगे डाॅ0 बी.वी.एस. यादव

Posted on 11 September 2014 by admin

उ0प्र0 पशुधन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ0 बलभद्र सिंह यादव ने समस्त मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारियों को पशुचिकित्सालयों पर दुधारू पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान करने हेतु पशुपालकों की जानकारी के लिये उपलब्ध उच्च गुणवत्तायुक्त सीमेन का सम्पूर्ण विवरण साईन बोर्ड पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इस व्यवस्था से पशुपालक दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में कामयाब होंगे।
डाॅ0 यादव ने बताया कि यू0पी0 दुग्ध उत्पादन में देश में शीर्ष स्थान पर है। यू0पी0 को दुग्ध उत्पादन में विश्व स्तर पर स्थान दिलाने के लिये दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में योगदान हेतु समस्त पशुपालकों को सक्रिय पहल करनी होगी। मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान से पहले जिस सीमेन का प्रयोग किया जा रहा है उसका पूरा ब्योरा जानना बेहद जरूरी है। यह सुविधा अब समस्त पशु अस्पतालों में मिलेगी। सीमेन किस सांड का है, उसकी माँ तथा उक्त पशु के वंशजों का पूरा विवरण रखा जायेगा। इससे यह पता चलेगा कि सांड़ की माँ (गाय) कितना दूध देती रही होगी। कृत्रिम गर्भाधान से होने वाली बछिया से कम से कम आधा दूध तो मिलेगा ही। इस व्यवस्था से पशुपालकांे को उनके पशुओं के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने में काफी मदद मिलेगी। कृत्रिम गर्भाधान में अब प्रयुक्त होने वाले सीमेन की गुणवत्ता, उत्पादन/प्रजनन क्षमता का भी ब्योरा रखा जायेगा।
डाॅ0 यादव ने बताया कि यदि पाँच लीटर दूध देने वाली गाय अथवा भैंस का कृत्रिम गर्भाधान किसी 15 लीटर की गाय या भैंस के सांड़ से करा दिया जाये तो उससे उत्पन्न बछिया अथवा पडि़या से 15 लीटर दूध मिलना निश्चित है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी जानकारी एवं सतर्कता से दुग्ध उत्पादकों को बहुत बड़ा फायदा होगा। पशुपालकों की जानकारी तथा अधिक दूध देने वाली अच्छी नस्ल की गाय तथा भैसों का कृत्रिम गर्भाधान करके उच्च कोटि की दुधारू नस्लों का प्रजनन एवं संवर्धन किया जा सकता है।
डाॅ0 यादव ने बताया कि पशु अस्पतालों में उच्च कोटि के सीमेन की उपलब्धता की सूचना नोटिस बोर्ड पर चस्पा होने से पशुपालक स्वयं प्रेरित होकर अपने पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान उक्त सीमेन से करायेंगे तो अच्छी नस्लों के दुधारू पशुओं का जन्म होगा। इससे पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करने में काफी लाभ होगा। उन्होंने बताया कि हिमांचल के पालमपुर, पंजाब के नाभां, राजस्थान के बस्सी, हैदराबाद, नागपुर तथा सलोन से सीमेन मंगाया जा चुका है। हैदराबाद से मुर्रा भैंस का सीमेन भी मंगाया जा चुका है जिसे विभिन्न पशु चिकित्सालयों में सुरक्षित रखा गया है।
डाॅ0 यादव ने बताया कि पशुपालकों की अधिक जानकारी के लिये सभी सीमेन के सांड़ की माँ, साड़ की माँ की माँ तथा बाप उसके वंशज का पूरा ब्योरा भी मौजूद है। इससे पशुपालक जागरुक होकर अपने गाय/भैंस आदि पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान करा कर अच्छी नस्ल की बछिया व पडि़या उत्पन्न कर सकते हैं। जो बड़ी होकर पर्याप्त मात्रा में दूध देगी जिससे पशुपालकों की आर्थिक/सामाजिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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