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भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि चुनावों मे इतनी करारी शिकस्त के बावजूद समाजवादी कुनबा मुगालते में है।

Posted on 22 May 2014 by admin

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि चुनावों मे इतनी करारी शिकस्त के बावजूद समाजवादी कुनबा मुगालते में है। प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि लोकतंत्रिक मूल्यों की दुहाई देती समाजवादी पार्टी यह तो बताये कि क्या चुनावी हार के बाद सरकार में बैठे लोग अस्पताल में ईलाज के लिए, बिजली के लिए सवाल खड़े करेंगे कि चुनावों में वोट नही दिया इसलिए नही दिया जायेगा।
पार्टी के राज्य मुख्यालय पर बुधवार को संवाददताओं से बातचीत करते हुए प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था का आलम यह है कि एक बार फिर पसंद-नापसंद के अधिकारियों की तैनाती का खेल शुरू हो गया। कानून व्यवस्था कैसे पटरी पर आयेगी सोचने के बजाये कद्दावर मंत्रियों के दबाव में फिर अधिकारियों की तैनाती की बिसात बिछनी शुरू हो गयी। हार से हताशा के दौर में पहंुच चुकी समाजवादी पार्टी कार्यवाही के नाम पर जिन दर्जाप्राप्त मंत्रियों से पिण्ड छुडाया है। उससे स्पष्ट हो गया कि इनकी नियुक्ति वोट की जुगाड़ के लिए की गई थी, वोट का जुगाड़ नही कर पाये, इसलिए इन्हे पदमुक्त होना पड़ा। सरकार की इस कार्यवाही से भाजपा के आरोपों की पुष्टि हुई की वोट के जुगाड़ में रेवडि़यों की तरह लाल बत्ती बांटी जा रही थी, सरकार धन का अपव्यय किया जा रहा था। वोट न मिलने के कारण इन महानुभावों से पीछा छुड़ा लिया गया, पर इन पर जो जनता का पैसा शासकीय सुविधाओं के नाम पर खर्च हुआ उसका क्या होगा?
उन्होने कहा कि बुलन्दशहर में डाक्टर ने गंभीर झुलसे मरीज को बिजली सुविधा देने से मना किया, कहा वोट दिया मोदी को और बिजली मांगते हो सपा सरकार से। यहीं हाल प्रदेश भर में हो रहा है। बदले की भावना से जनता से कार्यवाही के प्रयास हो रहे है। आखिर जब यह समाचार प्रमुख चैनलों पर दिखाया गया तो सपा सरकार ने कार्यवाही क्यों नही की? वैसे तो पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी का सफाया हो गया है। जीता है तो केवल कुनबा फिर क्या पूरे प्रदेश में यह भेदभाव किया जायेगा।
श्री पाठक ने कहा कि सपा प्रवक्ता भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के बयान को अशोभनीय और अलोकतंत्रिक बता रहे है। शायद लोकतंत्रिक मूल्यों में उनकी आस्था नही है। उन्होंने सवाल किया कि दो से ढ़ाई साल पहले प्रत्याशी खड़ा कर अंतिम समय तक प्रत्याशी बदलते सपाईयों को क्या इतनी बड़ी जीत के बाद भाजपा की अगले चुनाव की तैयारी भी अलोकतंत्रिक लगती है। दरसल कथनी और करनी में विभेद करते समाजवादी पार्टी के नेता संविधान के प्रति निष्ठा और लोकतंत्र में जनादेश का मतलब तो हमे समझाा रहे है, पर यह तो बताये की क्या यहीं लोकतंत्र है कि चुनावों में हार के बाद जनता से प्राथमिक सुविधाएं मात्र इसलिए छीनी जायेंगी की उन्होंने मोदी को वोट दिया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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