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रामकृष्ण मिषन सेवाश्रम के अन्र्तगत विवेकानन्द पाॅलीक्लीनिक एवं आर्युविज्ञान संस्थान, लखनऊ द्वारा मरीजो की विभिन्न जटिल एवं पुरानी बिमारियों के इलाज के साथ-साथ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न विधियों के माध्यम से स्वस्थ रहन-सहन को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया जाता है।

Posted on 10 May 2014 by admin

रामकृष्ण मिषन सेवाश्रम के अन्र्तगत विवेकानन्द पाॅलीक्लीनिक एवं आर्युविज्ञान संस्थान, लखनऊ द्वारा मरीजो की विभिन्न जटिल एवं पुरानी बिमारियों के इलाज के साथ-साथ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न विधियों के माध्यम से स्वस्थ रहन-सहन को बढ़ावा देने का प्रयास भी किया जाता है।
यह हमारा सौभाग्य है कि हमारी इस सेवा में स्वामी प्रज्ञानन्द भाग लेगें। स्वामी प्रज्ञानन्द, जो कि त्रिवेणी योग विज्ञान प्रषिक्षण एवं चिकित्सा संस्थान, झूसी, इलाहाबाद के संस्थापक है। उन्होने सरल एवं वैज्ञानिक योग पद्धति द्वारा पिछले 05 महीनो में लखनऊ शहर के विभिन्न विद्यालयों/संस्थानों के लगभग 6000 विद्यार्थियों को सेवा प्रदान की है। विद्यार्थियो के अतिरिक्त उनके षिक्षक, अभिभावक व परिचित लाभान्वित हुये। उनकी इस सरल एवं वैज्ञानिक योग पद्धति से आम लोग अपने लम्बी बिमारियों से मुक्ति, शरीर एवं मस्तिष्क को जीवन्त उर्जा के साथ उर्जान्वित करके, पा सकते है।
उपरोक्तलिखित के संदर्भ में योगा जागरूकता षिविर का आयोजन शनिवार दिनाँक 10 मई, 2014 को प्रातः 10ः30 बजे से 12ः00 बजे तक विवेकानन्द पाॅलीक्लीनिक एवं आर्युविज्ञान संस्थान, लखनऊ के प्रथम तल में स्थित सेमिनार हाल में किया जा रहा है। जहाँ स्वामी प्रज्ञानन्द अपने यौगिक मेडिटेषन टेक्निक के बारे में बतायेगें। तत्पष्चात एक माह लम्बा योगा थेरेपी कैम्प का आयोजन 12 मई से 11 जून, 2014 तक अस्पताल परिसर में किया जायेगा। जहाँे पर निम्नलिखित बिमारियों की देखभाल उनके जड़ से की जायेगी-
ऽ    मोटापा, गठिया, ब्लड प्रेषर, दमा
ऽ    पेट से सम्बन्धित, थायराइड, स्पान्डिलाइटिस
ऽ    अनिद्रा, मानसिक तनाव, डिप्रेषन, कमर दर्द
ऽ    मधुमेह, हृदय रोग, माईग्रेन, महिलाओं व बच्चों से सम्बन्धित विभिन्न बिमारियों का योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा सफल इलाज किया जायेगा।
उपचार की प्रक्रिया में निम्नलिखित विधियों से होगा-
1.    शरीर को असीम प्राण-उर्जा से रिचार्ज करने की विधि
2.    शरीर की अन्तरंग सफाई-षुद्धि की क्रिया मुख्यतः शंख प्रक्षालन- सम्पूर्ण आँतों की सफाई, कुजल- पेट की सफाई, नेति - नाक, गला की शुद्धि क्रिया।
3.    प्राणायाम - यह पूर्ण रूप से वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो कि पूर्णतया श्वास पर आधारित है जिसके कई प्रकार है जैसे- ऊँ नाद-ब्रहम ध्यान, हूँ मंत्र का प्रयोग एवं बंध-मुद्रा।

4.    ध्यानष्- ध्यान हमारे जीवन का एक दुलर्भ तत्व है जहाँ पर हमारी आन्तरिक उर्जा उर्जावान होती है। यहाँ 108 ध्यान की तकनीक है जिसमें कुछ नीचे दिये गये पर विचार किया जायेगा-
पण्    शारीरिक सजगता
पपण्    श्वषन क्रिया का ध्यान
पपपण्    भ्रमण ध्यान
पअण्    विचारों के प्रति सजगता
अण्    आवाजों के प्रति सजगता
अपण्    सम्पूर्ण ब्रहमांड को पढ़ना
अपपण्    समग्र सजगता
अपपपण्    भ्रमध्य-ध्यान
ऐसा माना जाता है कि यह योगा जागरूकता षिविर ज्यादा से ज्यादा लोगो को उत्साहित करेगी कि लोग एक महीने लम्बे चलने वाले योगा थेरेपी प्रक्रिया में भाग लें ताकि उनको लम्बे समय तक फायदा सस्ते दरों एवं बिना किसी खतरे के मिले।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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