Categorized | लखनऊ.

केन्द्र से प्रदेश सरकार द्वारा 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग

Posted on 21 February 2014 by admin

सामाजिक न्याय अधिकार रथ यात्रा का उददेश्य देश के 56 प्रतिशत गरीब, पिछड़े और उपेक्षित समाज की आवाज उठाना और उन्हें अधिकार दिलाना है। उ0प्र0 राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री राम आसरे विश्वकर्मा ने आज यह जानकारी देते हुये बताया। उल्लेखनीय है कि सामाजिक न्याय अधिकार यात्रा अपने पांचवें चरण में पहुंच गयी है।
श्री विश्वकर्मा ने कहा कि हमारी मांग है कि भारत सरकार पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण कोटा पूरा करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाये। निजी क्षेत्रों तथा न्यायपालिका में भी पिछड़े वर्गों का आरक्षण आबादी के अनुसार किया जाय।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने 17 पिछड़ी जातियों कुम्हार, निषाद, मल्लाह, केवट, बिन्द, बाथम, कश्यप, राजभर आदि जातियों को अनुसूचित जाति में समिमलित करके उनके जाति प्रमाण पत्र जारी करने तथा उन्हें देय अन्य सुविधायें देने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केन्द्र की सरकार अभी तक इस बारे में निर्णय नहीं लिया।
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश की वर्तमान सरकार समाज के हर वर्ग के सुनियोजित विकास में लगी है। सरकार ने गरीबों के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनायें संचालित की है जिसमें मुफ्त लैपटाप, मुफ्त चिकित्सा, मुफ्त सिंचार्इ एवं मुफ्त शिक्षा के साथ बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता, कन्या विधाधन, किसानों की कर्ज माफी, किसानों के दुर्घटना बीमा की राशि बढ़ाकार 5.00 लाख रुपये करना तथा समाजवादी पेंशन आदि समिमलित है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने पिछड़े वर्गों के छात्र-छात्राओं को मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था, उनकी फीस प्रतिपूर्ति तथा उन्हें छात्रवृतित प्रदान करने के फैसले भी लिये है। पिछड़े वर्गों की गरीब लड़कियों की शादी के लिए शादी अनुदान तथा इस वर्ग के गरीबों की बीमारी पर उन्हें बीमारी अनुदान भी दिया जा रहा है। साथ ही बेरोजगार नौजवानों को कम्प्यूटर ट्रेनिंग देकर उन्हें स्वावलम्बी बनाया जा रहा है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.

Advertise Here

Advertise Here

 

October 2026
M T W T F S S
« Sep    
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
-->









 Type in