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दुग्ध संघा को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दुग्ध उत्पादों एवं विपणन पर विशेष जोर पांच करोड़ रुपये की लागत से लखनऊ में दही प्लांट

Posted on 13 February 2014 by admin

उ0प्र0 सरकार ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्वि करने तथा दुग्ध संघों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों के उत्पादन एवं बिक्री पर विशेष बल दिया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मा0 श्री अखिलेश यादव द्वारा लखनऊ में 05 करोड़ रुपये की लागत से 25 मीटि्रक टन प्रतिदिन क्षमता के एक दही प्लांट की स्थापना हेतु शिलान्यास के पश्चात निर्माण कार्य तेजी से शुरु किया जा रहा है इसी के साथ लखनऊ में ही मुख्यमंत्री द्वारा 1.40 करोड़ रुपये की लागत से एक मिल्क प्लांट की स्थापना हेतु शिलान्यास किये जाने के बाद कार्य तेजी से शुरु किया गया है। इस मिल्क प्लांट से 10 हजार बोतल प्रतिदिन क्षमता के स्टेरलाइज्ड फ्लेवर्ड मिल्क का उत्पादन होगा।
उ0प्र0 सरकार ने दुग्ध विकास विभागपी0सी0डी0एफ0 लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों को अम्बेडकर नगर जनपद में 21 करोड़ रुपये की लागत से 50 टन प्रतिदिन क्षमता के संतुलित पशु आहार की संयंत्र की स्थापना हेतु कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिये है।
शासन ने दुग्ध उत्पादो को बढ़ावा देने तथा विपणन हेतु ठोस कदम उठाये हंै। मेरठ में 10 करोड़ रुपये की लागत से 20 ग्राम मक्खन बिलस्टर पैकिंग में, 04 करोड़ रुपये की लागत से फ्लैक्सी पैक में एस0एम0पी0 एवं डेरी व्हाटनर 200 ग्राम एवं 500 ग्राम पैकिंग हेतु तथा गुलाब जामुन, रसगुल्ला टिन पैकिंग हेतु 1.75 करोड़ रुपये एवं दो मीटि्रक टन की प्रतिदिन क्षमता वाले पनीर प्लांट तथा एक करोड़ रुपये की लागत से 200 ग्राम एवं 500 ग्राम वैक्यूम पैक हेतु प्लांट  की स्थापना का कार्य प्रस्तावित किया जा चुका है।
दुग्ध विकास विभाग द्वारा हापुड़ में नोयेडा द्वारा संचालित दही, मटठा एवं छाछ की 200 ग्राम एवं 400 ग्राम में पैकिंग हेतु तीन करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव है। वाराणसी में 1.75 करोड़ रुपये के व्यय से गुलाब जामुन, रसगुल्ला की टिन पैकिंग एवं 1.50 करोड़ रुपयेे व्यय से 400 ग्राम के पालीपैक तथा एक किग्रा0 एवं पांच किलोग्राम के पालीजार में दही पैकिंग का प्लांट लगाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। मथुरा में 95 लाख रुपये की लागत से 05 मीटि्रक टन क्षमता के मटठा, छाछ, सादा व मटठा दही प्लांट की स्थापना के लिए उ0प्र0 सरकार ने ठोस कदम उठाएं है। उक्त उत्पादों के उत्पादन से प्रदेश के लोगों को अच्छी गुणवत्ता के मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पाद उपलब्ध हो सकेगें और दुग्ध संघ आर्थिक रुप से और अधिक मजबूत होगें जिससे किसानों को अच्छा दुग्ध मूल्य मिलेगा।
दुग्ध विकास विभाग के माध्यम से प्रदेश के लोगों, किसानों, दुग्ध उत्पादकों एवंं, व्यवसायियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर सरकार ने सराहनीय पहल की है। ग्रामीण क्षेत्रों में दुग्ध समिति ग्रामों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत  सभी धर्म एवं जाति के लोगों को दो, चार, छ:, आठ एवं दस दुधारु पशुआें की मिनी डेरियों की स्थापना से रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। सघन मिनी डेरी परियोजना का लाभ लेने हेतु सम्बनिधत जनपद के दुग्ध संघ के प्रबन्धक प्रधान प्रबन्धकों से सम्पर्क किया जा सकता है।
शहरी क्षेत्रोंकस्बों में दुग्ध एवं दुग्ध पदाथोर्ं की बिक्री हेतु मिल्कबार, मिल्क बूथ, दुग्ध विक्रय एजेन्ट बनाने के लिए जिले के प्रधान प्रबन्धकप्रबन्धक से सम्पर्क करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है। पराग, घी एवं मक्खन के स्टाकिस्ट बनकर व्यवसाय करने हेतु क्षेत्रीय विपणन कार्यालय लखनऊ, वाराणसी, मुरादाबाद, मेरठ से सम्पर्क करें। पराग संतुलित पशु आहार का टे्रड एजेन्ट बनने हेतु प्रभारी पराग पशु आहार निर्माणशाला वाराणसी तथा मेरठ से सम्पर्क करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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