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उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने निर्देश दिये

Posted on 11 December 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में 60 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके पात्र पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को उनके शेष जीवन काल हेतु जीविकोपार्जन में सहायता प्रदान किये जाने के उददेश्य से कम से कम चार सौ रूपये प्रतिमाह की पेंशन दिये जाने हेतु एक बेहतर कार्य योजना 15 दिन के अन्दर बनाकर प्रस्तुत की जाय। उन्होंने कहा कि पेंशन प्राप्त करने के पूर्व कम से कम पांच वर्ष तक निर्माण श्रमिक को पंजीकृत होना आवश्यक होगा तथा पांच वर्ष तक नियमित रूप से न्यूनतम अंशदान का भुगतान श्रमिक को अवश्य करना होगा।
मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन सिथत अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को पेंशन दिये जाने के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भवन एवं अन्य सनिनर्माण कार्य अत्यन्त ही शारीरिक क्षमता से जुडे़ हुए कार्य मुख्य रूप से हैं और निरन्तर कार्यरत रहने के फलरूवरूप शारीरिक क्षमता ह्रास की सिथति होती है और बहुधा ऐसे श्रमिक 60 वर्ष की आयु प्राप्त होने के उपरान्त शारीरिक श्रम करने की सिथति में नहीं रह जाते हैं।उन्होंने कहा कि ऐसी सिथति में वृद्ध निर्माण श्रमिकों की आय में एकाएक ह्रास की सिथति उत्पन्न होती है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं रह जाते हैंं। योजना का उददेश्य इनकी आर्थिक क्षति को नियमित पेंशन के माध्यम से राहत प्रदान कराना है।
श्री उस्मानी ने कहा कि श्रमिक को निर्धारित प्रारूप पर प्रार्थना-पत्र और उसके साथ लाभार्थी परिचय-पत्र की प्रमाणित फोटो प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। श्रमिक की आयु की पुषिट एवं उसके वार्षिक अंशदान के विवरण, जो कि उसको निर्गत पहचान प्रमाण-पत्र में उलिलखित हो, को ही स्वीकार किया जायेगा, किसी अन्य प्रकार के प्रमाणन को स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि सम्बनिधत श्रमिक को किसी अन्य योजना के अन्तर्गत पेंशन का लाभ अनुमन्य होने की सिथति में उसे केवल एक ही पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि लाभार्थी को प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समापित पर जीवित होने का प्रमाण-पत्र किसी राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित करवाकर निर्धारित अवधि तक प्रत्येक वर्ष उपलब्ध करवाया जाना अनिवार्य होगा ताकि स्वीकृति आदेश के सम्बन्ध में आगामी वित्तीय वर्ष हेतु पेंशन की धनराशि निर्गमित की जा सके। उन्होने कहा कि जीवित होने का प्रमाण-पत्र उपलब्ध न कराये जाने की सिथति में आगामी वित्तीय वर्ष हेतु पेंशन स्वीकृत किया जाना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जीवित होने का प्रमाण-पत्र किसी भी समय वांछनीय होने पर उपलब्ध करवाया जाना लाभार्थी का स्पष्ट दायित्व होगा।
बैठक में प्रमुख सचिव श्रम, श्री शैलेश कृष्ण, श्रमायुक्त सुश्री शालिनी प्रसाद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपसिथत थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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