Categorized | लखनऊ.

धनगर को अनुसूचित जाति की सुविधायें बहाल कराने की लड़ार्इ लड़ने के लिए धनगर नेता निरंजन धनगर ने राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेष अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान से

Posted on 29 October 2013 by admin

धनगर को अनुसूचित जाति की सुविधायें बहाल कराने की लड़ार्इ लड़ने के लिए धनगर नेता निरंजन धनगर ने राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेष अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान से मिलकर राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद मा0 जयन्त चौधरी जी को धन्यवाद दिया।
धनगर को पूर्व में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया गया था परन्तु 2002 में धनगर को अनुसूचित जाति की सुविधा रोक दी गर्इ। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव ने मथुरा में धनगरों की पंचायत में वादा किया था कि उन्हें अनुसूचित जाति की सारी सुविधाएं पुन: बहाल करायेगें।
राष्ट्रीय लोकदल के वर्तमान प्रदेष अध्यक्ष व तत्कालीन सदस्य विधान परिषद मुन्ना सिंह चौहान ने कर्इ बार सदन में कार्य स्थगन प्रस्ताव लाकर इस मुददे को उठाया तथा राष्ट्रीय महासचिव मा0 जयन्त  चौधरी ने केन्द्रीय अनुसूचित जाति जन जाति के चेयरमैन श्री पी0एल0 पुनिया से मिलकर धनगर को अनुसूचित जाति की सारी सुविधाएं बहाल करने की मांग की। केन्द्रीय अनुसूचित आयोग ने  मामले की जांच कराकर अपनी बैठक में धनगर को अनुसूचित जाति का अंग मानते हुये सुविधायेंं बहाल करने का निर्देष दिया परन्तु प्रदेष सरकार ने अपनी हठधर्मी न छोड़ते हुये धनगर को अनुसूचित जाति की सुविधाएं न देने का फैसला बरकरार रखा तो मा0 उच्च न्यायालय तथा केन्द्रीय अनुसूचित आयोग के स्पष्ट निर्देष के कारण धनगर को अनुसूचित जाति की सुविधाएं बहाल करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं के संघर्ष व संवैधानिक लड़ार्इ लड़ने के कारण धनगरों को पुन: अनुसूचित जाति की सारी सुविधाएं बहाल हुर्इ है इसलिए धनगर समाज के लोगों ने राष्ट्रीय लोकदल का आभार व्यक्त किया है तथा एक बड़ी पंचायत करके राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव मा0 जयन्त चौधरी व प्रदेष अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान का आभार प्रकट करने का निर्णय लिया है।
यह जानकारी राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता ने एक प्रेस विज्ञपित में दी।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.

Advertise Here

Advertise Here

 

June 2026
M T W T F S S
« Sep    
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
-->









 Type in