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शिकागों में विश्वधर्म सम्मेलन उद्बोधन की 120वीं वर्षगाठ

Posted on 12 September 2013 by admin

श्री स्वामी विवेकानन्द जी द्वारा 11 सितम्बर 1893 में शिकागों में विश्वधर्म सम्मेलन को दिए गये उद्बोधन की 120वीं वर्षगाठ पर पूर्व नेता विधान परिषद विन्ध्यावासिनी कुमार के नेतृत्व में श्री श्री चित्रगुप्त कायस्थ जन कल्याण समिति के तत्वधान में बड़ी संख्या में लोगों ने आज अमीनाबाद पार्क में स्थापित स्वमी विवेकानन्द की प्रतिमा पर पुष्प माला चढ़ा कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। इस अवसर पर विन्ध्यावासिनी कुमार ने शिकागों में स्वामी विवेकानन्द जी द्वारा विश्वधर्म सम्मेलन में दिए गए ओजस्वी भाषण के कुछ अंश पढ़कर उपस्थित समुदाय को सुनाया तथा वर्तमान की परिस्थितियों में स्वामी जी के संदेश से प्रेरणा लेकर विषम सामाजिक व राजनैतिक स्थितियों से निजात पाने का संदेश दिया। edited-photo1

स्वामी विवेकानन्द जी द्वारा दिए गए भाषण के प्रमुख अंश

हम लोग सब धर्मो के प्रति केवल सहिषणुता में ही विश्वास नहीं करते वरन् समस्त धर्मों को सत्य मानकर ग्रहण करते हैं आपसे यह निवेदन करते हुए मुझे गर्व हो रहा है कि मैं ऐसे धर्म का अनुयायी हँू, जिसकी पवित्र भाषा संस्कृत में अंगे्रजी शब्द (बहिष्कार ) का कोई पर्यायवाची शब्द ही नही है। मुझे एक ऐसे देश का व्यक्ति होने का अभिमान है, जिसने इस पृथ्वी की समस्त पीडि़त और शरणागत जातियों तथा विभिन्न धर्मों के बहिष्कृत मतावलम्बियों का आश्रय दिया है। मुझे यह बतलाते हुए गर्व हो रहा है कि जिस वर्ष यहूदियों का पवित्र मन्दिर रोमन जाति के अत्याचार से धूल में मिला दिया गया, उसी वर्ष कुछ अभिजात यहूदी आश्रय लेने दक्षिण भारत में आये। हमारी जाति ने उन्हें अपनी छाती से लगाकर शरण दी। ऐसे धर्म में जन्म लेने का मुझे अभिमान है, जिसने पारसी जाति की रक्षा की और उसका पालन अब तक कर रहा है।

edited-photo_2साम्प्रदायिकता, संकीर्णता औश्र इनसे उत्पन्न भयंकर धार्मिक उन्माद हमारी इस पृथ्वी पर काफी समय तक राज कर चुके है। इनके घोर अत्याचार से पृथ्वी थक गयी है। उस उन्माद ने अनेक बार मानव-रक्त से पृथ्वी को सींचा है, सभ्यताएं नष्ट कर डाली हैं तथा समस्त जातियों को हताशः कर डाला है। यदि यह सब न होता तो मानव समाज आज की अवस्था से कहीं अधिक उन्नत हो गया होता; पर अब उनका भी समय आ गया है और मेरा दृढ़ विश्वास है कि जो घण्टे आज सुबह इस सभा के सम्मान के लिए बजाये गये, वे समस्त कट्टरताओं तलवार या लेखनी के बल पर किये जाने वाले समस्त अत्याचारों तथा मानवों की पारस्परिक कटुताओं के लिए मृत्यु-नाद सिद्ध होंगे। इससे सभी प्रभावित होकर अमेरिकावासी स्वामी जी के चहेते बने।

इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय ने ऐतिहासिक झण्डे वाले पार्क में व्याप्त भयानक गंदगी व अव्यवस्था पर भारी क्षोभ व्यक्त किया व कहा कि जिस महापुरूष ने पूरी दुनियां को अपनी ओजस्वी वाणी से संर्कीणताओं व बुराईयों के खिलाफ उठ खड़े होने का संदेश दिया तथा जिसके जनम की 150 वी वर्षगाठं दुनिया भर में मनाई जा रही है। ऐसे महापुरूष की मूर्ति जिस चबूतरा पर स्थापित किया गया हैं उसे भी तोड़ डाला गया है। उपस्थित लोगों ने सरकार से तत्काल झण्डेवाले पार्क की सफाई कर उसके सौन्दयीकरण व रखरखाव की व्यवस्था करने की मांग की है। उपस्थित प्रमुख लोगों में पूर्व नेता विधान परिषद विन्ध्यवासिनी कुमार, विनोद कुमार श्रीवास्तव, राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, हरीशचन्द्र श्रीवास्तव, राहुल सेन सक्सेना, डा0 ह्दयेश बिहारी, अनिल बाजपेयी, मुंशी इन्दु प्रकाश, श्री मती जयंति श्रीवास्तव, व मथुरेश श्रीवास्तव, गोपाल श्रीवास्तव, संजय तिवारी, श्रीमती प्रवीन श्रीवास्तव, मनु श्रीवास्तव, मैथलीशरण शुक्ल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

agnihotri1966@gmail.com

sa@upnewslive.com

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