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जाति धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों का विरोध

Posted on 13 July 2013 by admin

12 जुलाई।

युवा राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष आरिफ महमूद व प्रदेश मीडिया प्रभारी राम बाबू सुदर्शन ने माननीय हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए आरिफ ने कहा कि जाति आधारित सम्मेलनों पर प्रतिबन्ध लगाने से बसपा व सपा के पैरों तले की जमीन खिसखने के समान है। यह पार्टियां अभी तक प्रदेश भर में जातिवादी सम्मेलन कराकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही थी और जाति के नाम पर समाज को बांटने का कार्य कर रहे थीं। पूर्वर्ती बसपा सरकार 2007 के चुनाव में जाति आधारित भाईचारा कमेटी बनाकर प्रदेश की जनता का वोट हासिल करने के लिए समाज को बाटने का कार्य किया। पूर्वर्ती सरकार की सोच को लेकर चली सपा सरकार में भी जाति के आधार पर कार्यक्रमों का आयोजन कर समाज को जाति व धर्म में बाटने का कार्य किया। इन दोनों पार्टियों के अन्दर आने वाले 2014 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए जाति आधारित सम्मेलन के लिए आयोजन करने की होड़ लगी रहती थी। आज जो पार्टियां इस फैसले पर सहमति दे रही थीं हास्य पद लगता है।
क्योंकि कल जो राजनीतिक पार्टियां जाति के नाम पर सम्मेलन कर समाज को बाटने का कार्य कर रही थी, आज वही दल जनता को भ्रमित करने के लिए अपने सहमति देने का ढांेग कर रही हैं। अब ऐसे दलों से प्रदेश की जनता को होशियार हो जाना चाहिए।
प्रदेश मीडिया प्रभारी राम बाबू सुदर्शन ने कहा श्रधेय चैधरी चरण सिंह ने हमेशा जाति धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों का विरोध किया, चैधरी अजीत सिंह जी गरीब असहाय कम्जोर लोगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
डाॅ0 राम मनोहर लोहिया व डाॅ0 भीम राव अम्बेडकर के पद चिन्हों पर चलने वालों को याद रखना चाहिए कि लोहिया जी ने कहा था कि ‘‘जाति तोड़ो समाज जोड़ो‘‘ का नारा दिया था। डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर ने कहा था कि देश व प्रदेश की जनता का विकास तभी हो सकता है, जब सभी दल जाति व धर्म से ऊपर उठके राजनीति कर सत्ता में आयेगें। मा0 हाईकोर्ट का यह आदेश उन रानीतिक दलों के लिए तगड़ा झटका है जो अभी तक जाति धर्म के नाम पर राजनीति करते आ रहे हैं।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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