वन विभाग बाध्य

Posted on 08 July 2013 by admin

जनपद मे वन विभाग की चर्चा यूं तो पेड़ कटाने पर ही होती है मगर इस बार सरकार के मुखिया ने विभाग को वन महोत्सव मनाने के लिए बाध्य कर दिया है वो भी जनपद में ५० एकड़ मे कम से कम वृक्ष लगना ही चाहिए ।
गौरतलब हो प्रदेश व देश मे होने वाले घोटालो में अभी तक निर्माण आदि के घोटाले न्याय पंचायत से लेकर नेशनल हाईवे तक चर्चित रहे है मगर वन विभाग एक ऐसा विभाग है जहां आम जनता का सरोकार कम ही रहता है मगर अब इस विभाग के भी चर्चे आम है कारण है कि विभाग मे कोई लम्बा चैडा नियमित बजट नही आता है लेकिन अब केन्द्र सरकार की मनरेगा योजना और प्रदेश सरकार की दिलचस्पी ने जनता में उम्मीदे जगा दी है ।
जहां अब तक जिले के बन दरोगा पुराने पेडो की कटाई और लकड कटो की मिली भगत के लिए चर्चित रहे है । अब कम से कम नये वृक्षारोपण की जिम्मेदारी भी निभायेगें जिससे इनके समाजिक पाप तो धुलेगा ही आम जनता को पर्यावरण स्वच्छता और ग्लोबल वामिंग से कुछ राहत भी मिलेगी । विभागीय कर्मियों ने अपने स्वार्थ में न जाने कितने हरे भरे फलदार वृक्षो की कटान कराकर सुलतानपुर को नाम का अस्तित्व ही समाप्त करने की कोशिश की थी भला हो पर्यावरण इंजीनियर व सरकार के मुस्लिम का जिन्होने उत्त्तराखण्ड की आपदा से तुरन्त सीख लेते हुए पूरे प्रदेश को एक बार पुनरू हराभरा करने का बीड़ा उठाया है ।
जिसमें जाने अन्जाने वन विभाग के दोषी कर्मियों के पाप भी प्रवृति क्षम्य कर देगी और एक बार फिर वन विभाग का यह नारा सत्य साबित होगा कि वृक्ष क्षरा के आभूषण है मगर यही विभाग काश थोडा सा भी सतयुगी बन जाये और इन वृक्षो की दुखभरी कहानी को सुन सकें तो कितना अच्छा हो ये कलयुग मे कह रहे है कि हमें न काटो हरा पेड जवान बेटा होता है ।
ये हमारी धरती के भविष्य है इनसे ही मानव जीवन का भविष्य टिका है वर्ना नजर घुमा कर देखो या अपने आस पास के गांवो में नजर दौडाओं जो लोग केदान नाथ गये थे प्रकृति के कोप और पर्यावरण के असंतुलन के मृत्युदंड को प्राप्त हुए वो आज अब इस धरा पर नही लौट पायेगें । ये वन कर्मियों व लकड कटो चेत जाओं ये पेड नही मित्र है ये जीवन देते भी है तो पलक झपकते व्रहृोधित हो मानव को मृत्युदंड भी देते है ।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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