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जैविक खेती को प्रोत्साहन दिलाने के साथ-साथ प्रसंस्करण इकाइयां मण्डी कर से मुक्त होंगे: जावेद उस्मानी

Posted on 10 May 2013 by admin

10 मई, 2013

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव श्री जावेद उस्मानी ने निर्देश दिये हैं कि कृषि नीति उत्तर प्रदेश-2013 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराने हेतु सम्बन्धी विभाग अपने विभाग से सम्बन्धित बिन्दुओं पर विस्तृत कार्ययोजना बनाकर आगामी 14 मई तक प्रमुख सचिव कृषि को अवश्य उपलब्ध करा दें। उन्होंने कहा कि प्रमुख सचिव कृषि आगामी 20 मई को सम्बन्धित विभागांे से प्राप्त कार्ययोजना को सम्मिलित कर प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि कृषि नीति के अन्तर्गत राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में उत्कृष्टता केन्द्र स्थापित कराये जाएंगे। उत्तर प्रदेश के अनुसन्धान परिषद का सुदृढ़ीकरण कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय शोध केन्द्रों पर क्षेत्र आधारित विशेष शोधांे की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। युवा एवं योग्य शिक्षकों के क्रान्तिक एवं उभरते क्षेत्रों के अकादमिक उत्कृष्टता को कार्यक्रम आधारित वित्तीय संसाधन की उपलब्धता द्वारा प्रोत्साहित कराया जायेगा। ग्रामीण अवस्थापना के निवेश को प्रोत्साहन, विकास में पंचायतीराज संस्थाओं, कृषि निवेश सहकारी समितियों की भागीदारी को सुनिश्चित कराने के साथ-साथ छोटी जल-संचय सुविधाआंे जैसे कम लागत के खेत-तालाब, नाला-बांध, अवरोध बांध एवं परकोलेशन पाॅण्डस् का विकास कराया जायेगा। महिलाओं की आवश्यकताओं के अनुसार कृषि तकनीक एवं यन्त्रों के विकास हेतु शोध एवं प्रसार को प्रोत्साहित कराने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूह की स्थापना करायी जायेगी। महिलाओं को प्रशिक्षण, परामर्शी सेवाएं तथा ऋण की सुविधा विभिन्न ऋण संस्थानों द्वारा सरलीकृत प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराया जाय। प्रत्येक जनपद में बड़े पैमाने पर प्रसंस्करण एवं शीत भण्डार गृहों की सुविधा की स्थापना हेतु निजी क्षेत्रों को भू-मूल्य छोड़कर पूंजीनिवेश पर अनुदान प्रदान कर प्रोत्साहित कराया जाय। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को प्रोत्साहन दिलाने के साथ-साथ प्रसंस्करण इकाइयों को मण्डी कर से मुक्त करना होगा।

मुख्य सचिव आज शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में कृषि नीति उत्तर प्रदेश-2013 के क्रियान्वयन हेतु आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसान हितैषी विपणन व्यवस्था का सृदृढ़ीकरण कराने के साथ-साथ तहसील स्तर पर मण्डियों का निर्माण कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के मूल्यों की अनिश्चितता के जोखिम को कम करने हेतु वायदा बाजार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ जिन्स विनिमय की स्थापना करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पादों के मूल्य संवर्द्धन को बढ़ावा देने के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना कराने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण हेतु तकनीक एवं मशीनांे का विकास कराया जाय।

श्री उस्मानी ने कहा कि रेशम उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु स्वयं सहायता समूह तथा सहकारी समितियों की सहभागिता से रेशम व्यवसाय का सुदृढ़ीकरण कराया जायेगा। निजी क्षेत्र में नई एवं पोषक उच्च उत्पादक सहतूत के पेड़ लगाने को प्रोत्साहन दिया जायेगा। कींट पालन के लिए प्रक्षेत्र उपकरणों के क्रय पर किसानों को अनुदान दिया जायेगा। रेशम पालन गतिविधियों में महिला सहभागिता को प्रोत्साहित कराने के साथ-साथ बीज उत्पादक केन्द्रों तथा ककून बाजार का सुदृढ़ीकरण कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के ज्ञान के विकास हेतु नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन कराया जाय। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के सामयिक समय पर अधिकतम मूल्य प्राप्त करने हेतु भण्डारण एवं विपणन की सुविधा ग्राम स्तर पर उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने कहा कि राज्य कृषि विपणन परिषद द्वारा महत्वपूर्ण विपणन केन्द्रों पर मुख्य भण्डारण सुविधाओं का विकास कर उत्पादों के वैज्ञानिक भण्डारण तथा इसके उचित मूल्य पर विक्रय की अवधि तक सुविधा उपलब्ध कराया जाय। उन्होंने कहा कि सब्जियों तथा फलों के यथोचित छटाई तथा पैकिंग हेतु कृषि समूहों तथा कृषकों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जायेगा।

बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आलोक रंजन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

agnihotri1966@gmail.com

sa@upnewslive.com

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