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प्रदेश में लड़कियों के लिंगानुपात सुधार हेतु कार्यशाला बच्चियों के जन्म का गिरता अनुपात तथा उनकी स्वास्थ्य रक्षा एक बड़ी चुनौती -सदाकान्त,प्रमुख सचिव

Posted on 01 March 2013 by admin

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव बाल विकास एवं पुष्टाहार श्री सदाकान्त ने कहा कि देश व प्रदेश में बच्चियों के जन्म का अनुपात तथा उनकी स्वास्थ्य रक्षा एक बड़ी चुनौती है। परिवार एवं समाज में लड़कियों के प्रति धारणा को बदलना होगा तथा उनके अस्तित्व और सुरक्षा को सुनिश्चित करना होगा। कस्बों और शहरों में कन्या भ्र्रूण हत्या को कड़ाई से रोकना होगा। साथ ही प्रत्येक बच्ची के जन्म का पंजीकरण कराना तथा उनमें व्याप्त कुपोषण को दूर करना होगा।
श्री सदाकान्त ने यह बात आज यहां कुर्सी रोड स्थित निपसिड के सभागार में आयोजित ‘‘शिशु लिंग अनुपात में सुधार हेतु क्षेत्रीय परामर्श’’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन के बाद कहीं। उन्होंने कहा कि जहां पर महिलाओं का सम्मान होगा वहां कन्या भ्रूण हत्या का अनुपात कम होगा। उन्होंने कहा कि आज के विचार-विमर्श से यह तथ्य निकलकर आया है कि इस क्षेत्र में प्रचार-प्रसार की बहुत आवश्यकता है। इस बात को प्राथमिकता दी जाये कि हर व्यक्ति इस बात को जान सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में बच्चियों को बचाने का प्रयास चल रहा है। चाहें वह चिकित्सक स्तर पर हो या परिवार  व किसी भी स्तर पर हो, इस पर हर स्तर से कड़ाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लड़कियों को बढ़ावा देने हेतु कन्या विद्याधन दिया जा रहा है ताकि बच्चियों को उच्च शिक्षा हेतु प्रोत्साहित किया जा सके। पढ़ी लिखी बच्ची एक अच्छी मां साबित होगी।

इस अवसर पर उपस्थित भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास सचिव श्री प्रेम नारायन ने कहा कि समाज में व्याप्त महिलाओं के प्रति भेदभाव को खत्म करने की जरूरत है। उन्हें हर कदम पर बराबरी का अधिकार देना होगा। बच्चियों के माता-पिता को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ उनके जीवन की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करना होगा।
श्री प्रेम नारायण ने कहा कि महिलायें सभ्य समाज के विकास की धुरी हैं। अतः वे सभी सुविधाओं की हकदार हैं। उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श में तरह-तरह की सोच निकलकर सामने आयी है। इस नयी सोच से हम सबकों इस क्षेत्र में कार्य करने में सफलता हासिल होगी।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2011 में देश का लिंगानुपात 940 (1000) तथा 0-6 वर्ष के बीच की आयु में 914 था। जिसमें शहरों की 902 तथा गांव-देहात का 919  है। उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात 899, गुजरात का 886, जम्मू कश्मिर का 859, हरियाणा का 830 था, देश के 640 जिलों में से 461 जिलों का जन्मानुपात काफी कम है जिसमें हरियाणा में 0-6 वर्ष के बच्चों का लिंगानुपात 774 (1000) है। अतः ‘‘बच्ची नही तो संसार नहीं’’ को चरितार्थ करता है।
इस अवसर पर अपर सचिव एवं योजना निदेशक (NMEWMWCD) श्रीमती कुमारी रत्ना प्रभा, श्रीमती रश्मि सिंह अधिशासी निदेशक एन0एम0 ई0डब्लू0 एम0डब्लू0 सी0डी0 के साथ विभिन्न क्षेत्रों से आये डाक्टर झारखण्ड महिला आयोग की अध्यक्ष, महिला एवं बाल विकास से जुड़े अधिकारी व एन0जी0ओ0 के सदस्य आदि ने अपने विचार व्यक्त किये।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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