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साबरमती जेल में सुरंग खुदने की घटना की हो सीबीआई जांच

Posted on 15 February 2013 by admin

जेल में ही अभियुक्तों की फर्जी एनकाउंटर की आशंका
अभियुक्तों को गुजरात से बाहर किसी जेल में रखा जाए
लखनऊ 14 फरवरी 2013

रिहाई मंच ने साबरमती जेल में बंदियों द्वारा कथित तौर पर सुरंग खोदने के मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग करते हुए कहा कि यह हास्यास्पद होने के साथ-साथ शक पैदा करता है कि जेल के भीतर किस प्रकार से बंदी सुरंग खोद सकते हैं। जबकि जेल के चप्पे-चप्पे की निगरानी जेल में भीतर तैनात कारागार पुलिस बल द्वारा की जाती है।
रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुएब और आवामी काउंसिल के महासचिव असद हयात ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कथित तौर पर दो महीने और उससे अधिक अवधि से सुरंग खोदी जा रही थी इसका पता जिस प्रकार से जेल अधिकारियों के संज्ञान में आने की कहानी बताई जा रही है, वह गढ़ी हुई प्रतीत होती है, क्योंकि कुछ जेल सूत्रों के हवाले से छपी खबरों में बताया गया है कि 6 महीने से तो कुछ में एक महीने से सुरंग खोदने की बात बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि खोदने के बाद निकली हुई मिट्टी कितनी तादाद में थी और कहा रखी जा रही थी और किन औजारों से खोदी जा रही थी इन सभी संन्दर्भाें में अन्र्तविरोधी बातें सामने आयीं हैं। ऐसे में इन प्रश्नों की गहरी जांच होनी चाहिए कि जेल अधिकारियों द्वारा यह पहले से क्यों नहीं जाना जा सका कि कोई सुरंग खोदी जा रही है? चूंकि अभियुक्तों के विरुद्ध जेल अधिकारियों का व्यवहार पहले से ही दोषूपर्ण और पक्षपातपूर्ण रहा है, जिसके तहत उनके ऊपर ईद की नवाज के दौरान हमला और जेल में बर्बर पिटाई की घटनाएं भी होती रहीं हैं। इसलिए संभव है कि अभियुक्तों के विरुद्ध उन्हें नुकसान पहुंचाने की नियत से यह मामला बनाया गया हो।
रिहाई मंच ने कहा कि अभियुक्तों को उनके वकीलों और परिजनों से भी नहीं मिलने दिया जा रहा है और वे अज्ञातवास की स्थिति में जेल में बंद हैं। यह मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है। विशेषकर इन परिस्थितियों में जब यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि राज्य एजेंसियों द्वारा इन अभियुक्तों का ब्लास्ट के मामलों में झूठा अभियोजन किया गया है, तब ऐसे में सुरंग खोदने की यह नई कथित घटना का प्रकाश में आना राज्य एजेंसियों के एक अन्य कुत्सित प्रयास के रुप में देखा जाना चाहिए कि वे नहीं चाहतीं कि इनकों न्यायालय से जमानत मिले।
रिहाई मंच ने कहा कि साबरमती में बंद अभियुक्तों की सुरक्षा खतरे में है। मुमकिन है कि जेलों में उनकी हत्यांए कर दी जाएं और उन्हें आत्महत्या या भागते हुए दिखाकर एनकाउंटर बताया जाय। यदि सुरंग खोदने की घटना राज्य एजेंसियों का एक कुत्सित प्रयास है तो इन अभियुक्तों के पक्ष में यही न्याय होगा कि इन्हें गुजरात राज्य से बाहर किसी राज्य में रखा जाए और वहीं इनके मुकदमों की सुनवाई हो।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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