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जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया गया

Posted on 08 December 2012 by admin

उ0प्र0राज्य विद्युत उपभोक्ता परिशद की ओर से आज उ0प्र0विद्युत नियामक आयोग में मेसर्स टोरेन्ट पावर के अनुबन्ध को समाप्त करने सहित अनेको बिन्दुओं पर एक जनहित प्रत्यावेदन दाखिल किया गया। जिसमें प्रबन्ध निदेशक दक्षिणांचल श्री ओ0पी0जैन पर टोरेन्ट पावर को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए उनके द्वारा असंवैधानिक तरीके से टोरेन्ट पावर के रोलआउट प्लान को पास कराने का षडयन्त्र का बड़ा खुलाशा किया गया।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष एवं विश्व ऊर्जा कौसिल के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा द्वारा आयोग में सौपे गये जनहित प्रत्यावेदन में यह दर्शाया गया कि मैसर्स टोरेन्ट पावर जो आगरा-षहर में इनपुटबेस फ्रन्चाइजी के रूप में कार्य कर रही है, के नियम विरूद्ध एग्रीमेंट को अविलम्ब समाप्त किया जाय।  विगत दिनों उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर नियामक आयोग द्वारा टोरेन्ट पावर के खिलाफ उपभोक्ता उत्पीड़न की जांच कराई गयी थी जिसमें यह साबित हुआ था कि टोरेन्ट पावर उपभोक्ताओं का उत्पीड़न कर रहा है। जिसके सम्बन्ध में आयोग द्वारा उपभोक्ता उत्पीड़न सम्बन्धी मामले में प्रबन्ध निदेषक दक्षिणांचल से कृत कार्यवाही की रिपोर्ट अविलम्ब तलब की गयी थी, परन्तु अभी तक उस पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी।
चैकाने वाला मामला तो तब सामने आया जब प्रबन्ध निदेषक, दक्षिणांचल श्री ओ0पी0 जैन द्वारा 01-12-2012 को टोरेन्ट पावर के लगभग 360 करोड रूपये के रोलआउट प्लान (वर्श 2012-13) को आयोग से अनुमोदित करने हेतु उसकी फीस 18 लाख रूपये बिना अनुमति के आयोग को भेजी गयी है। जब कि आयोग द्वारा दिनांक 14 सितम्बर, 2012 को  प्रबन्ध निदेषक श्री ओ0पी0जैन द्वारा पूर्व में भेजे गये फीस की धनराशि 18 लाख रूपये के ड््राफ्ट को यह कहते हुए वापस कर दिया गया था  कि जब तक आयोग का कोई आदेष न हो कोई भी फीस न भेजी जाय। प्रबन्ध निदेषक दक्षिणांचल द्वारा जिस तरह से पुनः बिना आयोग के आदेष के 18 लाख रूपये का ड््राफ्ट आयोग को प्रेशित किया गया है वह पूरी तरह इस बात को साबित करता है कि प्रबन्ध निदेषक दक्षिणंाचल नियम विरूद्ध टोरेन्ट पावर के रोलआउट प्लान को आयोग से अनुमोदित कराना चाह रहे हैं जो आयोग के आदेषों की खुला अवमानना है। प्रबन्ध निदेषक का यह कृत्य इस बात को साबित करता है कि वह टोरेन्ट पावर के साथ वह साठ-गांठ कर उसे फायदा पहुंचाने के जुगत में प्रयत्नशील है ऐसे में आयोग को इस प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए प्रबन्ध निदेषक, दक्षिणांचल के विरूद्ध कठोर कार्यवाही करना चाहिए। यह कितना सोचनीय है कि प्रबन्ध निदेषक दक्षिणांचल जो स्वतः उपभोक्ता उत्पीड़न की जांच कर टोरेन्ट पावर के खिलाफ रिपोर्ट दे चुके हैं अब जब उस पर कार्यवाही की बात आई तो उसके असंवैधानिक कृत्य को संवैधानिक दर्जा दिलाने हेतु नियम विरूद्ध कार्यवाही में लगे हैं। नियमानुसार आयोग द्वारा जब वर्श 2012-13 के आय-व्यय के आधार पर प्रदेष की सभी बिजली कम्पनियों का विद्युत दर घोशित किया जा चुका है जिसमें दक्षिणांचल भी षामिल है और टोरेन्ट पावर उसी का फ्रन्चाइजी है। फिर अब वर्श 2012-13 के रोलआउट प्लान की बात करना क्या असंवैधानिक नहीं हैं?
उपभोक्ता परिशद ने टोरेन्ट पावर के खिलाफ उपभोक्ता उत्पीड़न की जांच के परिप्रेक्ष्य में आयोग से मांग की है कि आयोग अविलम्ब टोरेन्ट पावर के अनुबन्ध को जनहित में समाप्त करने की कार्यवाही करे तथा प्रबन्ध निदेषक, दक्षिणांचल के खिलाफ भी कठोर कदम उठाये जिनके द्वारा नियम विरूद्ध टोरेन्ट पावर के रोलआउट प्लान को आयोग से अनुमोदित कराने हेतु शडयंत्र किया जा रहा है और बिना आदेष के रू0 18 लाख का बैंक ड््राफ्ट भेजा गया है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने मा0 मुख्यमन्त्री जी से ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की है जो अधिकारी अपने स्वार्थ में टोरेन्ट पावर को संरक्षण दे रहे है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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