मनरेगा में डुप्लीकेशन व फर्जी काम रोकने के लिए जी.पी.एस./ जी.आई.एस. आधारित माॅनीटरिंग सिस्टम लागू

Posted on 13 November 2012 by admin

फिलहाल तीन जनपदों के तीन विकास खण्डांे में सक्रिय प्रणाली को आगे पूरे राज्य में लागू किया जायेगा  -आलोक रंजन

उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री आलोक रंजन ने आज यहां बताया कि राज्य में मनरेगा योजना में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए जी.पी.एस./जी.आई.एस. आधारित माॅनीटरिंग की एक नवीन प्रणाली लागू की गयी है। उन्होंने बताया कि जी.पी.एस/जी.आई.एस. को मनरेगा में पायलेट योजना के रूप में प्रदेश के लखीमपुर, हरदोई एवं उन्नाव जनपदों के एक-एक विकास खण्डों में लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि एन0आई0सी0 के सहयोग से तैयार की गयी इस प्रणाली द्वारा मनरेगा योजना के कार्यों को गूगल-अर्थ पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसकी प्रभावशीलिता का मूल्यांकन करने के बाद इस प्रणाली को पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा।
श्री आलोक रंजन ने बताया कि जी.पी.एस/जी.आई.एस. प्रणाली से उपलब्ध कार्य विवरणों के फोटोग्राफ को अक्षांश एवं देशान्तर के साथ राज्य के ग्राम विकास विभाग की वेबसाइट www.rd.up.nic.in में उपलब्ध किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष 20012-13 में मनरेगा योजना के तहत जनपद हरदोई के ब्लाक कछौना, लखीमपुर-खीरी के ब्लाक कुम्भी (गोला) एवं उन्नाव के ब्लाक सिकन्दरपुर कर्ण में कराये गये सभी कार्यों को फोटो-चित्रित कर विभाग की वेबसाइट www.rd.up.nic.in पर प्रस्तुत किया गया है।
ग्राम विकास आयुक्त श्री अनिल गर्ग ने इस मौके पर कृषि उत्पादन आयुक्त को सूचित किया कि मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता को बढ़ाने वाली माॅनीटरिंग प्रणाली द्वारा ग्रामीण सम्पर्क, बाढ नियंत्रण, जल संरक्षण और जल संचय, पारंपरिक जल निकायों के नवीनीकरण, सूखारोधन, सिंचाई नहरें, सिंचाई

सुविधाएं अ.जा./अ.ज./इन्दिरा आवास योजना, भूमि विकास, राजीव गांधी सेवा केन्द्र, तटयीय क्षेत्र, ग्रामीण पेय जल, मत्स्य पालन एवं ग्रामीण स्वच्छता से संबंधित सभी जानकारियां गुगल अर्थ एवं ग्रामीण विकास विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
इस अवसर पर उन्होंने बताया कि इस प्रणाली के लागू होने से पूर्व में किये गये सभी कार्यों को दुबारा करके दिखाने की प्रवृत्ति (डुप्लीकेशन) का पता चल सकेगा एवं कार्य का निर्धारण ज्यादा तार्किक होगा तथा एक क्षेत्र विशेष में विकास कार्यों का विश्लेषण भी किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ फर्जी फिकेशन को रोका जा सकेगा तथा विकास कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
तकनीकी निदेशक श्री जी0पी0सिंह ने बताया कि इस प्रणाली के अन्तर्गत ग्राम विकास विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध शीर्षक स्टेट रिलेटेड लिंक के तहत मनरेगा वर्क मैपिंग (पायलेट प्रोजेक्ट) नाम से एक नवीन विकल्प प्रदान किया गया है जिसके अन्तर्गत 14 प्रकार के कार्यों की स्थिति जैसे पूर्ण कार्य, प्रगतिशील/निलम्बित कार्य/स्वीकृत कार्य, प्रस्तावित कार्य का विवरण दिखाई देगा, एवं इसके पश्चात् continue विकल्प को क्लिक करने पर जनपद चुना जा सकेगा तथा चिन्हित विकास खण्ड की ग्राम पंचायतों के कार्य विवरण को देखा जा सकेगा। उन्होंने जानकारी दी कि कार्य के विवरण के अन्तर्गत जिला, विकास खण्ड, ग्राम पंचायत के नाम के साथ-साथ कार्य का नाम एवं कोड, कार्य का प्रकार तथा कार्य का फोटो उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली द्वारा देश के किसी भी कोने से उत्तर प्रदेश में कराये गये मनरेगा के कार्यों को देखा जा सकेगा।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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