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ट्रान्सफार्मरों की आपूर्ति करने वाली फर्मों को पावर कारपोरेशन द्वारा बचाये जाने हेतु किये जा रहे षडयंत्र की घोर निन्दा की गई

Posted on 09 August 2012 by admin

उ0प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिशद की आज एक आवश्यक बैठक उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई जिसमें पावर सेक्टर में खराब गुणवत्ता के ट्रान्सफार्मरों की आपूर्ति करने वाली फर्मों को पावर कारपोरेशन द्वारा बचाये जाने हेतु किये जा रहे षडयंत्र की घोर निन्दा की गई। उपभोक्ता परिषद कल होने वाली नियामक आयोग की बैठक में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठायेगा साथ ही आगामी बिजली दर प्रस्ताव सहित आये दिन हो रही विद्युत दुर्घटनाओं पर भी चर्चा करेगा।
अध्यक्षता करते हुए उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि मा0 मुख्यमंत्री महोदय की घोषणा के बावजूद भी घटिया ट्रान्सफार्मर कम्पनियों को ब्लैक लिस्ट करने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कभी कार्यवाही के नाम पर कमेटी बनाने की बात की जाती है और कभी चार्टेडएकाउन्टेन्ट के माध्यम से रिपोर्ट मंगाने की बात की जाती है जो पूरी तरह नियमों के विपरीत है। गारन्टी पीरियड में जले ट्रान्सफार्मर कम्पनियों का प्रतिशत क्या है यह बिजली कम्पनियों के पास उपलब्ध है। पावर कारपोरेशन ने खुद माना है कि पिछले दो वर्षांे में थ्री स्टार रेटिंग के परिवर्तकों की गारन्टी पीरिएड में क्षतिग्रस्तता ओवर आल परफारमेन्स निगम प्रबन्धन द्वारा नियत सीमा 7 प्रतिशत से अधिक है। फिर ऐसे में कम्पनियों के खिलाफ ब्लैक लिस्टिंग की कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?  पावर कारपोरेशन ने खुद जो सीमा 7 प्रतिशत मानी है नियमतः वह किसी भी सूरत में  5 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। ऐसे में पावर कारपोरेशन अपनी कार्य प्रणाली पर स्वतः प्रश्नचिन्ह लगा रहा है। मा0 मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद भी ट्रान्सफार्मर कम्पनियों को ब्लैक लिस्ट इसलिए नहीं किया जा रहा है क्योंकि अनेकों कम्पनियां आर0ए0पी0डी0आर0पी0 योजना में करोडों का टेण्डर डाल रखी हैं और अब उसे लेना चाह रही हैं। पावर कारपोरेशन उन्हें टेण्डर तब तक नहीं दे सकता जब तक उन्हें ब्लैक लिस्ट सूची से बाहर नहीं किया जायेगा। बिजली विभाग के नियमों के अनुसार जो फर्में कोई भी सामग्री सप्लाई करेंगी उनकी परफार्मेंन्स रिपोर्ट सामग्री खरीदने वाली संस्था को क्षेत्रीय अधिकारी भेजेंगे। फिर ऐसे में चार्टेडएकाउन्टेंट की बात करना स्वतः संदेह उत्पन्न करता है। पावर कारपोरेशन आज तक बिजली कम्पनियों का आडिटेड  बैलेंस शीट चार्टेडएकाउन्टेंट से नहीं तैयार करवा पाया जिसके चलते कारपोरेशन को नियामक आयोग सहित अनेकों केन्द्रीय ऊर्जा संस्थानों में अपमान का घूट पीना पडा है और अब जो काम चार्टेडएकाउन्टेंट का नहीं है उसे उससे कराने की बात की जा रही है। पूरे भारतवर्ष में किसी भी ट्रान्सफार्मर कम्पनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए चार्टेडएकाउन्टेंट की आवश्यकता नहीं होती बल्कि निविदा का अनुबन्ध करने वाले अभियन्ता इसके लिए सक्षम होते हैं। कल होने वाली नियामक आयोग की सलाहकार समिति में इन सभी मुद्दों को उपभोक्ता परिषद पूरी गम्भीरता से उठायेगा और दोषी उच्चाधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेगा।
बैठक में ंप्रमुख रूप से सर्वश्री ओम प्रकाश, आर0के0 शुक्ला, माया राम, रंजीत, सुनील कुमार वर्मा, महेश अग्रवाल, रवीचन्द्र, सहित अनेकों पदाधिकारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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