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कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठकें औचित्यहीन है

Posted on 15 July 2012 by admin

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि बेलगाम हो रहे सपाईयों पर अंकुश लगाये बगैर कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठकें औचित्यहीन है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि अखिलेश यादव सरकार के सत्ता संभालते ही शुरू हुआ सपाई कार्यकर्ताओं का उत्पात बदस्तूर जारी है। थाने में पुलिसकर्मी बलात्कार पर उतर आये हैं, तो बाहर सत्ता के मदहोश में सपाई गुंडे आम आदमी को पीट-पीट कर बेहाल कर दे रहे हैं।
राज्य मुख्ययालय पर संवाददाताओं से बातचीत करते हुये पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री का सरकार और संगठन पर से नियंत्रण नही है। यही कारण है कि प्रदेश में कहीं पर पुलिस सपाई कार्यकर्ताओं से पिट रही है तो कहीं पर दारोगा थाने के भीतर महिला के साथ बलात्कार जैसे संगीन जुर्म को अंजाम देने से भी नहीं डर रहा है। मिर्जापुर में राज्य मंत्री के गुर्गों ने बाढ़ सागर कालोनी मंे बने गेस्ट हाउस के आवंटन को लेकर पी.डब्ल्यूडी. के अवर अभियंता की बेरहमी से पिटाई की। घटना के विरोध में अभियंता संघ हड़ताल पर है। कल ही कानपुर के बिठुर स्थित रमेलपुर गाँव में सपाईयों ने जमकर उत्पात मचाया, लूटपाट की और पुलिस के पहुँचने पर पुलिस पर गोलबारी की व पथराव किया। आखिर सत्तारूढ़ दल के इन दबंगों पर लगाम लगाये बगैर कैसे प्रदेश की कानून व्यवस्था ठीक होगी?
उन्होनें कहा कि सत्ता गठन के संकेत मात्र से फर्रूखाबाद के बलीपुर गाँव में सपाई समर्थकों ने दारोगा और सिपाही को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा व सरकारी जीप क्षतिग्रस्त कर दी। उसी दिन मुरादाबाद में सपा विधायक के समर्थकों ने दारोगा से मारपीट की, हंगामा काटा। बिसौली के सपा विधायक की कार से सिपाही कुचला और उसके बाद समर्थकों ने सिपाही को पीटा भी। सत्ता के संभालने के ठीक दूसरे दिन लखनऊ राजधानी में सत्ताधारी के गुर्गों ने तांडव किया। कैसरबाग क्षेत्र के नजीराबाद में सरेराह सिपाही को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। 21 मार्च को कानपुर में दबंग सपाईयों ने एक टैक्सी ड्राइवर को पीट-पीट कर बेरहमी से मार डाला।
श्री पाठक ने कहा कि 4 अप्रैल को नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़े करने को लेकर विधायक से हुई पुलिस के साथ झड़प का मामला ठंडा भी नहीं पड़ पाया था कि देवरिया में 13 अप्रैल को बैंक में विवाद होता है सपाई इत्मिनान से कैशियर को पीटते हैं। और तो और रायबरेली के सपा जिलाध्यक्ष के दामाद पुलिस पर ही फायर झोंक देते हैं। बदायूं के सपा विधायक अपने समर्थकों के साथ अपने कार्यालय में पूरे इत्मिनान के साथ एक व्यक्ति की पिटाई करते हैं और उसकी जमीन अपने नाम रजिस्ट्री करने का दवाब बनाते हैं। अप्रैल का माह बीतते-बीतते बिजनौर में सपाई बल भर बवाल काटते हैं और पुलिसकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हैं। हंडिया (इलाहाबाद) के विधायक की दारोगा से जूते मारने की धमकी को लोग भूले ही नहीं थे कि सपाईयों ने लखीमपुर में डीपीआरओ को कार्यालय से घसीटकर हाथापाई की। हद तो तब हो गई जब बांदा में थाने से सशस्त्र बदमाशों को सपाईयों ने छुड़वाया। 23 मई को कानपुर में सब-स्टेशन पर धावा बोला, जेई को पीटा। फैजाबाद में ईओ को धुना और हंगामा मचाया। 4 जून को सपा के दबंगों ने एनटीपीसी में उत्पात मचाया, अगवा किया और 5 लाख फिरौती मांगी।
उन्होनें कहा कि ये वो घटनायें हैं जो समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपी हैं वास्तविकता यह है कि सत्तारूढ़ दल के लोग मुख्यमंत्री की मंशा ठीक उसी तरह नहीं समझ पा रहे हैं जिस तरह उ0प्र0 के अधिकारी। मुख्यमंत्री बार-बार दावे करते हैं, चेतावनी जारी करते हैं कि राज्य की कानून व्यवस्था ठीक हो पर कानून व्यवस्था को चुनौती उनके अपने लोग ही बनते जा रहे हैं। मांग करते हुये उन्होंनें कहा कि मुख्यमंत्री, जो स्वयं अपने पार्टी के मुखिया भी हैं, ऐसी व्यवस्था करें कि राज्य की कानून व्यवस्था को चुनौती बन रहे उनके लोगों पर लगाम लग सके।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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