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शिक्षा के क्षेत्र में भी नए प्रयोग होने चाहिए

Posted on 08 June 2012 by admin

untitled-1शिक्षा समाज का दर्पण है। नित नए सामाजिक परिवर्तन हो रहे है। लिहाजा शिक्षा के क्षेत्र में भी नए प्रयोग होने चाहिए। शिक्षा के विविध आयाम तलाशती संगोष्ठी बालिका विद्या निकेतन इंटर कालेज में हुई। संगोष्ठी ंिचंतन एवं दि लखनऊ एजूकेशन सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में हुई। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री एवं समाज सेविका बेगम हामिदा हबीबुल्लाह ने कहा कि आत्मविश्वास का मूल आधार शिक्षा है। शिक्षा ही समाज को संपूर्णता देगी। कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षत रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि समाज गतिशील और विकास के पथ पर अग्रसर है। शिक्षा सुदृढ़ समाज की नींव रखती है। नीव मजबूत करनी है तो इस दिशा में आमूल चूल परिवर्तन करने ही होगें। लविवि के पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रो. महेंद्र सिंह सोढ़ा ने कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या, सीमित संसाधन और शिक्षा में बढ़ती अपेक्षाओं के कारण शिक्षा प्रणाली के सम्मुख अनेक चुनौतियां है। चिंतन एवं एजुकेशन सोसाइटी के मंत्री/सचिव सर्वजीत सिंह ने कहा कि शैक्षिक स्तर में सुधार के लिए शिक्षकों को स्वयं में सकरात्मक बदलाव लाने होंगे। चिंतन के सह संयोजक दिनेश कांडपाल ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए जनता की सहभागिता विचार के स्तर पर होनी चाहिए। संगोष्ठी का संचालन शैलेन्द्र शुक्ला ने किया। इस अवसर पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डाॅ. आरके शर्मा, डाॅ. जेबी घोष और डाॅ. उपेंद्र मिश्र को सम्मानित किया गया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
agnihotri1966@gmail.com
sa@upnewslive.com

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