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मीडिया जनता की आवाज है

Posted on 05 November 2011 by admin

प्रेस परिशद के निवर्तमान Chairman न्यायमूर्ति जी.एन. रे ने कहा है कि मीडिया जनता की आवाज है। भारतीय लोकतंत्र में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
श्री रे आज `अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, माध्यम और ख़तरे विशय पर हिंदी समाचार-पत्र सम्मेलन द्वारा गोमतीनगर में स्थित हिंदी मीडिया सेंटर में आयोजित विचारगोश्ठी को संबोधित कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति तथा प्रेस परिशद के Chairman रहे श्री रे ने कहा ि क वे मीडिया को नियंत्रित करने के प्रेस परिशद के मौजूदा Chairman की राय से सहमत नहीं हैं।
उन्होने कहा कि आज मीडिया का निगमीकरण एक ख़तरनाक संकेत है। मीडिया घरानों के साथ कारपोरेट घरानों के स्वार्थो के कारण आज मीडिया की आलोचना की जा रही है। फिर भी हम मीडिया को नियंत्रित किए जाने या उसे प्री सेंसर किए जाने के पक्षधर नहीं हैं।
यह बात भी काफी हद तक सही है कि मीडिया आज ख़ास समूह की आवाज को उठा रहा है, लेकिन यह अपवादस्वरूप है।भारत के मीडिया का इतिहास दो सौ तीस साल पुराना है। कम प्रसार के समाचार-पत्रों का भी समाज पर असर होता है और वह लोगों को प्रेरणा देता है। मीडिया ही समाज का आईना है। मीडिया ही है कि बहुत से सरकारी गैर सरकारी गलत कार्यो पर रोक लगाने का काम कर रहा है। मीडिया जनता को गुमराह करने के बजाए जबाबदेह और जिम्मेदार होना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट केअवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति सै. हैदर अब्बास रजा ने कहा कि मीडिया को स्वयं निगरानी इकाई बनाना चाहिए। कोई सरकार या निगरानी अथारिटी इसे नियंत्रित करे यह उचित नहीं है। इसी के साथ इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि मीडिया को पुिश्ट करके तथा सही ख़बरें ही देनी चाहिए। अयोध्या मामले में जिस प्रकार का व्यवहार मीडिया ने 1990 के समय में किया उसकी आलोचना प्रेस परिशद ने भी की थी। मीडिया कौंसिल के बारे में पूर्व लोकायुक्त श्री रजा ने कहा कि प्रेस मीडिया तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए एक अथारिटी हो यह उचित नहीं रहेगा। अख़बारों को ओंबुसman रखना चाहिए जिससे वे अपनी कमियों को स्वयं जांच सकें।
देश के स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारों की बड़ी भूमिका रही है। देश की गुलामी के दौर में जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं थी उस समय भी अख़बारों का आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता निबाzध स्वतंत्रता नहीं है, यह लोगों को नहीं भूलना  चाहिए।
न्यायमूर्ति श्री रजा पुराने दिनों की याद करते हुए कहा कि पहले अख़बारों में संपादकों का इतना सम्मान होता था कि manager लाख कोशिश करना चाहे उसकी राय सर्वोपरि नहीं हुआ करती थी।
उन्होने कहा कि अयोध्या मामले में मुझसे एक गल्ती हुयी थी की मेरे समय में ही अयोध्या के मामले को फैजाबाद से हाईकोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ पीठ में स्थानांतरित किया गया।
इसके पूर्व न्यायमूर्ति जी.एन.रे को हिंदी समाचार-पत्र सम्मेलन के संरक्षक ‘ाीतला सिंह, उपाध्यक्ष राजीव अरोड़ा, मंत्री रजा रिजवी, महामंत्री सुमन गुप्ता, कोशाध्यक्ष प्रदीप जैन द्वारा ‘ााल ओढ़ाकर तथा प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर ‘ााहिरा नईम द्वारा श्रीमती गार्गी रे को भी सम्मानित किया गया।
आईपीएस अधिकारी एस आर दारापुरी ने कहा कि मीडिया आमजन की आवाज के बजाए वर्ग विशेश के समूहों की ही ख़बरें दे रहा है।
सर्वश्री के. सी मिश्रा मेजर एस.एन. त्रिपाठी, राज्यमुख़्यालय पर मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति के उपाध्यक्ष मुदित माथुर, ए.पी दीवान, पत्रकार दुर्गेश ‘ाुक्ला,रामकिशोर, अधिवक्ता इंदू सिंह, पत्रकार अरविंद ‘ाुक्ला, हरीराम त्रिपाठी, नरेंद्र बहादुर सिंह, दिनेश वर्मा, एल.एन.मिश्रा आदि ने भी संबोधित किया।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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