प्रदेश सरकार ने गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के बारे में गहनता से विचार करते हुए उनको रहने के लिए एक आवास प्रदान करने की नियत से कांशीराम आवास योजना का संचालन किया जिसमें उन्हीं पात्र व्यक्तियों का आवास देने के निर्देश दिये गये जो वास्तव मंे गरीबी रेखा से जूझ रहे हैं और जो कड़ाके की ठंड, तपती धूप एवं वर्षा के मौसम से बचने के लिए एक छत नहीं जुटा पा रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए बहन जी ने यह योजना चलायी और जिसके लिए अरबों रुपये की धनराशि को खर्च करने में लगी हुई और आवासों को निर्माण कराने के लिए उच्च क्वालिटी की सामग्री के प्रयोग को ध्यान में रखते हुए मानक तैयार किया गया और इस मानक के अनुरूप आवासों का निर्माण कराने की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी गयी, परन्तु प्रशासन की लचर कार्य प्रणाली, लापरवाही एवं धन प्रलोभनता के कारण आवासों के निर्माण कार्यों में घटिया किस्म की सामग्री का प्रयोग ठेंकेदार लोग कर रहे।
पुवायां के सतवां मार्ग पर इस समय कांशीराम शहरी आवासों का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। जिसमें नीव मंे अब्बल ईट की रोड़ी की जगह पर पीला व दोम ईंट की रोड़ी का प्रयोग, दीवाल चुनाई मंे आठ एक का मसाला, डीपीसी में छह एक का मसाला और मोरंग थर्ड क्वालिटी की मसालों मंे प्रयोग की जा रही है तथा सरिया डीपीसी में डेढ़ सूत की डालते हैं जबकि तीन सूत की पड़नी चाहिए। इस प्रकार से ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्यों मंे घटिया किस्म की सामग्री का प्रयोग करके प्रदेश सरकार की मंशाओं पर प्रशासन की मिली भगत से ठेकेदार पानी फेर रहे है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com