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गाय, गीता, गंगा, गायत्री ये ाारतीय संस्कृति के चार स्ता

Posted on 10 March 2011 by admin

गाय के पंचगव्य जैसे दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर को गषियों व मुनियों ने औषधिया¡ गुणों का ाण्डार बताया है। यही वजह है कि आयुवेüद में पंचगव्य का विशेष महत्व है। लोगों के स्वास्थ्य की ाातिर पंचगव्य के उपयोग को बढावा देने के लिए गायत्री परिवार आज से 13 मार्च तक निशुल्क पंचगव्य चिकित्सा परामर्श शिविर लगायेगा। शिविर बाईपास रोड çस्थत शारदा गु्रप ऑफ इंस्टीट्यूशन कार्यालय में लगाया जायेगा। गुरूवर पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के जन्म शताब्दी कार्यक्रमों के तहत उनकी जन्माूमि आंवलोडा आगरा में होने का कारण यह आयोजन किया जा रहा है।

डॉ0 बाल स्वरूप गर्ग ने बताया कि करीब एक लाा लोग गंाीर बीमारियों से ग्रस्त हैं उनका इलाज पंचगव्य से हो सकता है। हम 3भ्000 लोगों पर पंचगव्य का परीक्षण्श सफलता पूर्वक कर चुके हैं। आंवलोडा गौशाला में तैयार पंचगव्य लागत मूल्य पर शिविर में उपलब्ध होगा। उनके साथ कमलकान्त शर्मा, विमलेश गर्ग, सन्तोष गर्ग ाी परीक्षण करेंगे। गाय के एक तोले घी का दीपक करीब एक टन ऑक्सीजन बनाता है। ार्राटे लेने वालों को गौ घृत की नश्य, दिल के मरीजों को गौ दुग्ध, डायबिटीज के रोगियों के लिए मट्ठा अच्छा है। आगरा आलू का क्षेत्र है। अगर गाय का गोबर-मूत्र बतौर ााद डालें तो ऑगेüनिक फसल अज्छी होगी। गायत्री शçक्तपीठ, आंवलोडा के जोन प्राारी उत्तर-प्रदेश पुरूषोत्तम दुबे ने बताया कि पंचगव्य अत्याधुनिक तरीकों से शोधित कर दवा रूप में इस्तेमाल योग्य बनाते हैं। गाय, गीता, गंगा, गायत्री ये ाारतीय संस्कृति के चार स्ता हैं। लोग गायत्री मन्त्र का जाप और पंचगव्य का इस्तेमाल करें तो वह स्वयं ही स्वास्थ्य रहेंगे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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