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पीसीएस अधिकारी रिश्वत लेते गिरफ्तार

Posted on 17 August 2010 by admin

मामला बिजली विभाग में ठेकेदारी के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रिश्वत माँगना एक पीसीएस अफसर को ले डूबा। विजिलेंस ने रिश्वत लेते उसे रंगों हाथ पकड़ लिया।

बिजली विभाग में ठेकेदारी करने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय का एनओसी आवश्यक होता है। इसके बगैर लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। इतवारी गंज निवासी पवन कुमार साहू ने ठेकेदारी के लिए आवेदन किया था,जो लाइसेंस प्रक्रिया पूरी करने के लिए विभाग के कई दिन से चक्कर काट रहा था। उसने बताया कि लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर विद्युत विभाग निदेशालय के सहायक निदेशक मनोज कुमार सिंह ने उससे 60 हजार रुपए माँगे। न देने पर फाइल को लटका दिया। इस पर उसने सतर्कता विभाग से सम्पर्क किया। मामला पीसीएस अफसर का होने के कारण पहले तो शासन से स्वीकृति माँगी गई। जिलाधिकारी ने नायब तहसीलदार सदर सुबोध मणि शर्मा को गवाही के लिए लगा दिया। इसके बाद सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टर अशोक कुमार आवेदक के साथ चाचा बनकर विद्युत परिषद कार्यालय गए और रुपए कम लेने की बात कहते हुए पाउडर लगे 10 हजार रुपए देने लगे। इस पर सहायक निदेशक ने कम रुपए होने के कारण लेने से मना कर दिया। 30 हजार रुपए पर मामला तय हुआ। आज पवन सर्तकता विभाग के इन्सपेक्टर के साथ पहुंचा और 30 हजार रुपए में रसायनिक पाउडर लगे एक हजार के दस तथा 500 के चालीस नोट दिए, तो सहायक निदेशक ने तुरन्त उनको पकड़ लिया। इस दौरान इन्सपेक्टर गवाह नायब तहसीलदार को अपना मोबाइल फोन चालू कर सारी बातें सुनाते रहे। जैसे ही मनोज ने रुपए लिए, उनको पकड़ लिया गया। सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टर नरेश कुमार, सीएल दिनेश, जेपी सुमन ने कई लोगों के सामने हाथ धुलाए, तो सहायक निदेशक के हाथों से झाग के साथ गुलाबी पानी निकलने लगा। इस पर सतर्कता विभाग के इन्सपेक्टरों ने आरोपी सहायक निदेशक को गिरफ्तार कर थाना नवाबाद के हवाले कर दिया। इस सम्बन्ध में सहायक निदेशक मनोज कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि रुपए टेबिल पर रखे थे, उन्होंने हाथ तक नहीं लगाया।

रिश्वत का ये ममला झाँसी में नया नही है लगभग हर विभाग में  रिश्वत का खेल चल रहा है कोई कम लेता है तो कोई ज्यादा. कर कर्मचारी अधिकारी  महगाई के ज़माने में सिर्फ सरकारी तनख्व में  गुजरा करने को त्येयार   नही है हर किसी  को कहिये  दो  नम्वर  का पैसा.

मगर  इसमें कुछ तो कभी कभी हिंदी फ़िल्म खट्टे मीठे के  “सचिन चिट्कुले”  की तरह अपना काम निकलने के लिए अधिकारियो या कर्मचारियों को फसाने की कोशिस भी करते है. आज हर विभाग में भार्स्ताचार का बोलबाला है जिसे मिटने में हर आम आदमी को सोचना पड़ेगा.

Vikas Sharma
Editor
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