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Archive | विज्ञान

*”Celebrating Biodiversity” on the International Day for Biological Diversity*

Posted on 23 May 2011 by admin

The U.P. State Biodiversity Board today celebrated the International Day for
Biological Diversity. A National Conference was organized on the occasion
which was attend by forest officers, scientists, academicians, non-profit
organizations and representatives of other departments like fisheries,
agriculture, horticulture and animal husbandry. The theme for this year’s
International Day for Biodiversity is “Forest Biodiversity”. This is
significant as last year 2010 was the International year of Biodiversity and
this year 2011 has been declared by the United Nations as the International
year of Forests. The United Nations has also declared 2011 to 2020 to be the
International Decade for Biodiversity. About 400 delegates attended this
conference. Also India comprises 2-4% of the world’s land area, 4% of water
but is home to 8% of recorded species of flora and fauna of the world. In
India the forest cover is about 23.8% but UP has a forest cover of 9.01%  of
the total geographic area.

The chief guest on the occasion was the honourable forest minister of Uttar
Pradesh , Shri Fateh Bahadur Singh who inaugurated the conference. He said
that UP was one of the pioneer states to form a Biodiversity Board and UP
has been sensitive to the cause of biodiversity conservation. The important
guest speaker on the occasion was Shri. P.K. Sen who has been awarded the
Padamshree in March 2011. Shri P.K. Sen has a wide experience in management
of Zoos and National Parks and has also worked as Director, Project Tiger.
He  said that more than 70% of India’s biodiversity is confined within
forests.

Shri P.B. Gangopadhyay, Ex- PCCF of Madhya Pradesh and Ex-Addl. D.G.,
Ministry of Environment and Forests, Govt. of India also spoke on the
occasion. He gave a beautiful powerpoint presentation on the 16 forest types
in India. His talk covered the major threats to biodiversity – land
diversion, encroachment, fuelwood removal, grazing. forest fires, Illicit
felling, habitat fragmentation. He said he was happy that everyone agreed
that biodiversity is to be saved. Atleast there was consensus on the saving
of biodiversity. he made two main requests: To have an alternative railway
line at Dudhwa second : lowest level has lot of vacancies , especially at
forest guard level. It is on them that survival of forests depends. In MP
about 4000 new forest guards were recruited in 2008. Similar efforts are
needed in other states also.

Shri Raman Sukumar, Professor and Chairman, Centre for Ecological Sciences,
Indian Institute of Science, Bangalore. Mr. Sukumar has specialization in
Wildlife Ecology and Tropical Forest Ecology. He spoke on the importance and
resilience of tropical rain forests .Moderately dense forests are about 40%
. He said that abundance of Tigers forests are highest in tropical dry
forests. Non timber forest products from dry forests in India generate
revenues of 700 million $ annually. He also spoke on carbon sequestration
potential of tropical dry forests in India. There is a great resilience
built into tropical rain forests in India. He said long term planning is
needed for India’s forests. He presented 20 year growth data for a forest in
Mudumalai in Tamilnadu which proved that more than long term planning makes
more sense for forest planning than just 3-4 years planning. He said that
compared to tropical evergreen forests the tropical dry forests may not be
species rich but have their own intrinsic values and may be an important
carbon sink in the face of environmental variability and disturbance. this
is very important for international policy discussions under UNFCC.

Shri K. Venkatraman, Director, Zoological Survey of India spoke about
India’s rich biodiversity. He emphasized on the importance of saving old
growth forests which are just 36% of the total forests. He also said that a
recent study showed that a hectare of forests gave an average of 6000$ worth
of ecological services. Dr. P.K.Singh, Director, Botanical Survey of India
was also present on the occasion. He said that India has 167 species of
important agri-horticultural crops.

The conference was a grand success. Scientists from National Botanical
research Institute, Birbal Sahani Institute of Paleobotany, Central
Institute of Medicinal and Aromatic plants, CDRI, Sugarcane Breeding
Research Institute and National Bureau of Fish and Genetic Resources,
Director Institute of Subtropical Horticulture, Shri Ravishanker along with
forest officers from all over the state were present at the occasion.

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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जिला विज्ञान समन्वयकों के कार्यों की त्रैमासिक समीक्षा की जाय - अब्दुल मन्नान

Posted on 02 July 2010 by admin

क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारियों के उत्तरदायित्व   पुन: निर्धारित किये जायें

क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी आगरा को चेतावनी दी गई

लखनऊ - जिला विज्ञान क्लबों के कोआर्डिनेटर्स के कार्यो की उच्च स्तर पर प्रत्येक तीन माह में समीक्षा अवश्य की जाय। वर्तमान में विज्ञान के प्रति बच्चों में कम हो रहे रूझान को बढ़ाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के समस्त आयामों का प्रचार-प्रसार किया जाय। क्लबों द्वारा वैज्ञानिक व्याख्यान, बच्चों के लिए विज्ञान प्रतियोगितायें, कठपुतली, विज्ञान नाटक, टेक्नालॉंजी प्रदर्शन, स्वरोजगार जागरूकता व प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विज्ञान नुक्कड़ नाटक आदि कार्यक्रम सक्रिय रूप से लगातार चलाये जायं। क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारियों का उत्तरदायित्वों का पुन: निर्धारण किया जाय। समन्वयकों को निरन्तर ट्रेनिंग देने का कार्य भी क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारियों द्वारा किया जाय।

यह निर्देश प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मन्त्री श्री अब्दुल मन्नान ने विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने बैठक में आगरा के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी का कार्य सन्तोषजनक नहीं पाया। विज्ञान मन्त्री ने उन्हेें कायोंZ में सुधार लाने तथा अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन भलीभान्ति करने हेतु चेतावनी दी।

श्री मन्नान ने कहा कि जब तक सभी मण्डलों में क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्रों की स्थापना नहीं हो जाती है तब तक चार क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्रों, दो नक्षत्रशालाओं तथा लखनऊ एवं लखनऊ मुख्यालय कुल सात स्थलों से ही सभी जिला विज्ञान क्लबों के कार्यों पर भलीभान्ति नियन्त्रण रखा जाय। बैठक में क्षेत्रीय विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक अधिकारियों ने उनके वित्तीय अधिकार पुन: बहाल किये जाने तथा कैडर सम्बंधी एवं अन्य शासकीय समस्यायें भी मन्त्री जी के समक्ष रखी गईं।

बैठक में प्रमुख सचिव, श्री बी0एम0मीणा, विश्ेाष सचिव श्री पी0सी0जैन, निदेशक एवं सचिव डॉ0 एम0के0जे0सिद्दीकी, संयुक्त निदेशक श्री आई0डी0राम सहित सभी वरिष्ठ चारों मण्डलों के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी उपस्थित थे।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री
मो0 9415508695
upnewslive.com

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महिलाओं को मिलेगी आज़ादी कांटे वाला फीमेल कॉन्डोम रोकेगा बलात्कार

Posted on 24 June 2010 by admin

aaसाउथ अफ्रीका की डॉक्टर सॉनेट एहलर्स ने ऐसा फीमेल कॉन्डोम डेवलप किया है जिसके इस्तेमाल से बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों पर रोक लग सकती है। बलात्कार की कोशिश करने वाले पुरुष को अपनी इस हरकत की सजा मिलेगी। बलात्कार की कोशिश करने के बाद उसे दिन में तारे नज़र आने लगेंगे और उसके गुप्तांग में बेहद तेज दर्द होगा। पुरूष को ज़माने भर की जग-हसांई मिलेगी सो अलग से।

‘रेप एक्स’ (यानि बलात्कार पर कुल्हाड़ी) नाम के इस कॉन्डम की खासियत यह है कि इसमें कांटों की एक कतार जैसी लगी होती है। अगर कोई पुरुष बलात्कार करने की करता है और महिला की योनि में अपना गुप्तांग प्रविष्ट करवाता है तो इस अनोखे कॉन्डोम पर लगे दांतों जैसे कांटे उसके पेनिस को जकड़ लेते हैं। पुरूष अपने पेनिस को निकालने की जितनी ज्यादा कोशिश करेगा, इन कांटों की पेनिस पर पकड़ और भी ज्यादा गहरी होती जाएगी। बलात्कारी पुरूष ना तो टॉयलेट जा सकेगा और न ही चल-फिर पाएगा।

ये चमत्कारी कॉन्डोम ‘रेप एक्स’ सिर्फ डॉक्टर की मदद से ही निकलवाया जा सकेगा। डॉक्टर एहलर्स ने बताया कि चूंकि ये कांटे घाव नहीं बनाते इसलिए पीड़ित महिला को हमलावर के शरीर से निकलने वाले किसी भी प्रकार के द्रव के संपर्क में आने का खतरा नहीं रहता है।

इस कॉन्डम को 20 बरसों के रिसर्च के बाद बनाया गया है। फिलहाल ये ट्रायल पीरियड में है लेकिन जल्द ही यह लगभग 100 रुपये में मिलने लगेगा। यह उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा जिन्हें जोखिम भरी जगहों  पर जाना हो।

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