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	<title>UP News Live &#187; ज्योतिष</title>
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	<pubDate>Wed, 28 Sep 2022 10:00:54 +0000</pubDate>
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		<title>संस्कृत संस्थान का स्थापना दिवस सम्पन्न</title>
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		<pubDate>Mon, 31 Dec 2012 15:41:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>

		<category><![CDATA[लखनऊ.]]></category>

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		<description><![CDATA[निःशुल्क ज्योतिष परामर्श शिविर आयोजित
संस्कृत संस्कारों की जननी है, यदि संस्कृति को बचाना है तो पहले देववाणी  संस्कृत को बचाना होगा। संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो हमारे संस्कारों की  आधारशिला है।
संस्कृत के सुप्रसिद्ध वयोवृद्ध विद्वान और उत्तर  प्रदेश संस्कृत संस्थान के पूर्व निदेशक डाॅ0 रमेश चन्द्र दुबे ने यह विचार  [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>निःशुल्क ज्योतिष परामर्श शिविर आयोजित<br />
संस्कृत संस्कारों की जननी है, यदि संस्कृति को बचाना है तो पहले देववाणी  संस्कृत को बचाना होगा। संस्कृत एक ऐसी भाषा है जो हमारे संस्कारों की  आधारशिला है।<br />
संस्कृत के सुप्रसिद्ध वयोवृद्ध विद्वान और उत्तर  प्रदेश संस्कृत संस्थान के पूर्व निदेशक डाॅ0 रमेश चन्द्र दुबे ने यह विचार  आज संस्कृत भवन में आयोजित उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के 36वें स्थापना  दिवस समारोह के अवसर पर व्यक्त किये। उन्हांेने कहा कि यह तो देववाणी है  यह अमर है।<br />
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर संस्थान में कार्यरत रहे  सभी पूर्व निदेशकांे को आमंत्रित किया गया था। पूर्व निदेशक रहे डाॅ0 रमेश  चन्द्र दुबे, डाॅ0 सच्चिदानन्द पाठक, श्री प्रयागदत्त चतुर्वेदी, श्री  विनोद चन्द्र पाण्डेय, श्री मधुकर द्विवेदी, श्री सत्येन्द्र सिंह तथा  संस्थान की पूर्व अध्यक्ष डाॅ0 रेखा बाजपेयी उपस्थित थे।<br />
इस अवसर पर  संस्कृत कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें प्रो0 ओेम प्रकाश पाण्डेय,  डाॅ0 रेखा शुक्ला, डाॅ0 महानन्द झा, डाॅ0 राम सुमेर यादव, डाॅ0 विजयकर्ण  तथा डाॅ0 नवलता वर्मा ने काव्य पाठ किया। पूर्व निदेशक एवं संस्कृत के  विद्वान डाॅ0 ओम प्रकाश पाण्डेय ने बेटी पर अपनी मर्मस्पर्शी रचना ‘जीवन  रेखा समागृहे मे, संचारिणी शिखा’ का पाठ किया।<br />
कार्यक्रम के द्वितीय  सत्र में संस्थान द्वारा निःशुल्क ज्योतिष परामर्श शिविर का आयोजन भी किया  गया, जिसमें सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाॅ0 अनिल कुमार पोरवाल, श्री  प्रताप शुक्ल, श्री लक्ष्मीकान्त अग्निहोत्री, डाॅ0 अमित कुमार शुक्ल एवं  श्री उमेश कुमार पाण्डेय ने उपस्थित श्रोताआंे की कुण्डली देखकर उन्हें  ज्योतिष परामर्श प्रदान किया।<br />
इस मौके पर संस्थान में पूर्व में आयोजित ज्यातिष प्रशिक्षण शिविर के प्रशिक्षणार्थियों को प्रमात्रपत्र भी वितरित किये गये।</p>
<p>सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
agnihotri1966@gmail.com<br />
sa@upnewslive.com</p>
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		<title>सूर्य और शनि के आक्रोशों ने बदल दिया मौसम का मिजाज</title>
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		<pubDate>Wed, 18 Apr 2012 20:14:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>admin</dc:creator>
		
		<category><![CDATA[ज्योतिष]]></category>

		<category><![CDATA[हरदोई]]></category>

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		<description><![CDATA[हरदोई मंे तापमान दिन का ज्यादा गर्म उसकी अपेक्षा रात को ठण्डा रहता है मौसम विज्ञानी इसे मौसम का मिजाज बता रहे हैं जबकि ज्योतिष के जानकार इस बदले हुए ग्रहों की चाल इसका मुख्य कारण निकाल रहे हैं ग्रहों के स्थान परिवर्तन से मौसम का मिजाज बदल रहा है इसीलिए सभी जगहों पर अग्निकाण्ड, [...]]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p>हरदोई मंे तापमान दिन का ज्यादा गर्म उसकी अपेक्षा रात को ठण्डा रहता है मौसम विज्ञानी इसे मौसम का मिजाज बता रहे हैं जबकि ज्योतिष के जानकार इस बदले हुए ग्रहों की चाल इसका मुख्य कारण निकाल रहे हैं ग्रहों के स्थान परिवर्तन से मौसम का मिजाज बदल रहा है इसीलिए सभी जगहों पर अग्निकाण्ड, आंधी, तूफान वारिश, बर्फबारी बलवती हो उठी 7अप्रैल से प्रारम्भ हुए बैसाख मास से सूर्य मेष राशि में, शनि तुला राशि में प्रवेश करके एक दूसरे के आमने सामने आ गये हैं यह स्थिति 14मई तक इसी प्रकार चलेगी बैशाख में 5शनिवार एवं 5रविवार हैं रविवार सूर्य का दिन है सूर्य मेष में हैं एवं उच्च स्थान पर हैं परन्तु शनि वक्री होकर तुला राशि में नीचे की ओर हैं इसीलिये यह अग्निकाण्ड, आंधी, तूफान, बारिश सभी हो रही हैं। शास्त्री उमाकान्तअवस्थी के अनुसार 21मई को वृष में बुध गुरू में शुक्र और केतु प्रवेश करेंगे यह भी शुभ संकेत नहीं है ग्रहों के उलटफेर से मँहगाई, राजनैतिक संकट  उथल पुथल बहुत बढ़ेगा। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में 2मई को गुरू अस्त होकर 29मई को उदय होंगे दो जून को शुक्र अस्त होकर 11जून को उदय होंगे। दोनों ग्रहों को एक पक्ष में उदय और अस्त होना शुभ संकेत नहीं माना जाता है। इन ग्रहों की चाल और स्थान बदलने से काफी बुरा असर हमारे जीवन दर्शन पर पड़ता है प्रकोप और हानियाँ सभी कुछ सम्भव हैं। इसलिये शास्त्री उमाकान्त अवस्थी के अनुसार इनसे बचाव और समुचित उपाय करना हम सभी की जिम्मेदारी बनती है।</p>
<p>सुरेन्द्र अग्निहोत्री<br />
agnihotri1966@gmail.com<br />
sa@upnewslive.com</p>
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